छत्तीसगढ़

युवाओं की बेरोजगारी बनी विकराल समस्या : कांग्रेस

भाजपा सरकारों के पास न समाधान खोजने की क्षमता और न ही इच्छा शक्ति

रायपुर : भारत के और छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिये नौकरी की भारी कमी पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुये छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि हर दिन, नौकरी की तलाश में 30 हजार नये युवा रोजगार में आते है, लेकिन उनमें से सिर्फ 450 को ही नौकरी मिल पाती है। नौकरियों का निर्माण करने वाली नीतियां तैयार करने की बजाय मोदी सरकार और रमन सरकार नौकरियों की समस्या से ही मुंह मोड़े हुये है और झूठे मुखौटों के पीछे से ये खोखला दावा कर रही है कि अर्थव्यवस्था दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में औपचारिक क्षेत्र में नौकरियां पैदा कर रही है। हर आर्थिक समस्या को भाजपा की सरकारों के पास एक ही समाधान है।

वह समाधान झूठा प्रचार, खोखली नारेबाजी और आंकड़ो की बाजीगरी है। जिस 7 प्रतिशत विकास दर का नयी पद्धति के अनुसार का यह सरकार दावा कर रही है, कई प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वह पुरानी पद्धति के अनुसार मात्र 5 प्रतिशत है। मोदी सरकार की भय और दहशत पैदा करने वाली आर्थिक नीतियों से और मनमाने ढंग से थोपी गयी डरावनी गब्बर सिंह टेक्स कर व्यवस्था से देश के व्यापार और उद्योंगो को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। भाजपा की सरकारों ने प्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन पर भी बुरा असर डाला है, क्योंकि संगठित क्षेत्र की तीन-चैथाई से अधिक नौकरियां छोटे और मध्यम व्यपारियों द्वारा पैदा की जाती है। देश में खनन क्षेत्र को नये संकट का सामना करना पड़ रहा है खासकर गोवा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और ओडिशा में हजारों कामगार बेरोजगार हो गये है और मोदी सरकार के पास न ही समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता है और न ही कोई इच्छा शक्ति है।

आज सबसे विकराल समस्या हमारे लाखों युवाओं के लिये रोजगार की है। भारत के व्यापार, विनिर्माण, निर्माण और निर्यात द्वारा संचालित निजी क्षेत्र में बड़ी संख्या में अच्छी, फायदेमंद नौकरियों का निर्माण किया जा सकता है। मोदी सरकार ने ऐसा करने की बजाय प्रायोजित मुकदमेबाजी, परोक्ष धमकियां, नोटबंदी और बिना सोचे-समझे खराब ढंग से जीएसटी जैसी व्यापार विरोधीनीति लागू कर व्यापार और उद्योग को नुकसान पहुेचाया है। व्यापारियों और उद्यमियों का आर्थिक उत्पीड़न और कर आतंकवाद का सहारा लेकर उन्हें परेशान भाजपा सरकारों में आर्थिक आंतकवाद से नौकरिायां नहीं मिल पा रहा हैं एक ओर नौजवान बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे है दुसरी ओर भाजपा नेता पकौड़े को कौशल विकास कार्यक्रम में शामिल करने का बयान दे रहे है।

जो चाटुकारिता की पराकाष्ठा बताते रोजगार जैसे संवेदनशील विषय पर हल्की बयानबाजी कर भाजपा नेता लगातार देश और प्रदेश के बेरोजगारों का मखौल उड़ा रहे है। देश के युवाओं से पकोड़ा, चाट, सब्जी आदि ही बिकवाना था तो भाजपा ने अपने 2014 के घोषणा पत्र में हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वायदा क्यो किया था? देश की आबादी का 35 फीसदी हिस्सा युवाओं का है इन नौजवानों ने मोदी और भाजपा के द्वारा दिखाए गए रोजगार के सुनहरे सपनो के झांसे में आ कर भाजपा को चुना था अब जब देश का युवा रोजगार के वायदे पूरा करने के लिए सवाल खड़ा कर रहा है तब बेशर्मी पूर्वक उसे पकोड़े बेचने की सलाह दी जा रही है। लोगो ने अपना पेट काट कर अपने बच्चों को शिक्षा पकोड़े बेचने और ठेला लगाने के लिए नही दिलवाई है। देश के करोड़ो युवाओं ने रातों की नींद खराब कर पढ़ाई लिखाई पकोड़ा बेचने के लिए नही की है।

बेरोजगारी के घाव पर नमक लगाने तथा पकोड़ा बेचने के लिए किसी कौशल विकास प्रशिक्षण की जरूरत नही होती पेट की आग खुद करवा देती है। न चाय बेचना शर्म की बात है और न पकौड़े बेचना शर्म की बात है। लेकिन चाय, पकोड़े बेच कर अपने पुरुषार्थ के दम पर परिवार का भरण पोषण करने वालों की मेहनत को अपनी नाकामियों का ढाल बना कर अपनी सरकार की उपलब्धि बताने में मोदी और रमन को शर्म आना चाहिये। यदि गरीब आदमी पकोड़ा बेच रहा है इसमें आपका क्या योगदान? यह उसका पुरुषार्थ है वह अपनी रोजी निकाल रहा ,क्या मोदी के पीएम बनने के पहले लोग पकोड़ा, सब्जी,रेहड़ी लगा कर रोजगार पैदा नही करते थे ? रोजी रोटी की यह विधा मोदी ने शुरू करवाया ? भाजपा यह बताये हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था उसका क्या हुआ ? कितना रोजगार दिलवाया। क्या भाजपा के राज में पकोड़ा बेचना भाजपा की उपलब्धि है।

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