छत्तीसगढ़

‘क्वींस क्लब’ के रसूखदार संचालकों के सामने लाचार हुआ प्रशासन

नशे की पार्टी समेत तमाम अवैध गतिविधियां होने के बाद भी नहीं हुई एक अदद कार्रवाई

रायपुर। लॉकडाउन के दौरान रायपुर के क्वींस क्लब में जन्मदिन और नशे की पार्टी कराने वाले रसूखदार संचालक हरबक्श सिंह बत्रा और उसके परिवार के अन्य संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में हाउसिंग बोर्ड और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने घुटने टेक दिए हैं । पिछले ढाई महीनों से दोनों विभाग ने आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है । हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी जहाँ पिछले ढाई महीनों से इस मामले में लीगल ओपिनियन लेने का बहाना बना कर कार्यवाई करने से बच रहे है, वहीं पुलिस विभाग यह कह कर हाथ पर हाथ धरे बैठा है कि दिल्ली के केंद्रीय विभाग से बत्रा की कंपनी की जो जानकारी मांगी गई थी, वह जानकारी नहीं आई है।

हालाकि पुलिस जो जानकारी दिल्ली के ऑफिस से मंगवाना चाह रही है, वह जानकारी खुद बत्रा ने हाउसिंग बोर्ड को दिए अपने जवाब में दे दी है। पुलिस चाहती तो हाउसिंग बोर्ड से जानकारी मांग कर कार्रवाई कर सकती थी। यह महज संयोग भी नहीं है घटना के बाद शुरू से ही आरोपियों के रसूखदार होने के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की बात राजधानी में खुलेआम चल रही थी और अब दोनों विभाग के रवैए को देखते हुए इस पर मुहर लगती दिख रही है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने क्वींस क्लब के संचालन का जिम्मा एमिनेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को सौंपा था। हरबक्श सिंह बत्रा और उनके परिवार के 4 सदस्य इस कंपनी के डायरेक्टर हैं । लॉकडाउन के दौरान क्लब खुलने से लेकर यहां जो कुछ भी गैरकानूनी गतिविधियां संचालित की गई उन सब के लिए बत्रा और उसके परिवार के डायरेक्टर को भी आरोपी माना जाना चाहिए था। घटना के बाद पुलिस और हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने भी सही मानते हुए बत्रा के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन अब दोनों ही विभाग उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं ।

सबसे ज्यादा हास्यास्पद स्थिति हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की है। बोर्ड के अधिकारी पिछले ढाई महीनों से अपने ही विभाग के वकील से सलाह नहीं ले पा रहे हैं कि इस मामले में आरोपी बत्रा और उसके कंपनी के दूसरे डायरेक्टर्स के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी चाहिए । जबकि क्वींस क्लब को 9. 11 करोड़ का सौदा कर दूसरे को सब लीज पर दे देना, और लॉकडाउन के दौरान क्लब खुलवाने, पार्टी करवाने और शराब परोसने जैसी बातों में सीधे-सीधे कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल नियमां का उल्लंघन है। इस मामले में कॉन्ट्रैक्ट रदद् करने से लेकर उस पर एफआईआर कराया जा सकता था। लेकिन अब तक एफआईआर करना तो दूर, कॉन्ट्रेक्ट तक रदद् नही किया गया है।

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