केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा, दिल्ली व पड़ोसी राज्यों की प्यास बुझाएगी लखवाड़ परियोजना

नई दिल्ली : दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत दूर करने तथा पड़ोसी राज्यों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार यमुना नदी पर लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना बनाने जा रही है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए मंगलवार को छह राज्यों के मुख्मंत्रियों ने इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना से सभी छह राज्यों को पेयजल, सिंचाई और बिजली का फायदा मिलेगा।

छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
वैसे तो लखवाड़ परियोजना को 42 साल साल पहले मंजूरी दी जा चुकी थी, लेकिन अब तक इस पर काम शुरु नहीं हो सका। अब पहली बार संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनने पर इस योजना के पूरे होने की उम्मीद जगी है।

देहरादून के निकट यमुना नदी पर बनने वाली लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना के निर्माण के लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

कचरे में पड़ा है पांच लाख करोड़ का कारोबार : गडकरी
यह परियोजना ऊपरी यमुना बेसिन क्षेत्र में बनेगी और इस पर 3966.51 करोड़ रुपये की लागत आएगी। गडकरी का कहना है कि लखवाड़ परियोजना के पूरी होने पर इन राज्यों में पानी की कमी की समस्या का समाधान होगा, क्योंकि इससे यमुना नदी में हर वर्ष दिसंबर से मई/जून के सूखे मौसम में पानी के बहाव में सुधार आएगा।

लखवाड़ परियोजना को 1976 में मंजूरी दी गई थी, लेकिन इस परियोजना पर कार्य 1992 में रोक दिया गया। लखवाड़ परियोजना के तहत उत्तराखंड में देहरादून जिले के लोहारी गांव के निकट यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया जाएगा।

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बांध की जल भंडारण क्षमता 330.66 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) होगी। इससे 33,780 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जा सकेगी तथा घरेलू व औद्योगिक इस्तेमाल और पीने के लिए 78.83 एमसीएम पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। परियोजना से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा।

गडकरी ने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत यमुना नदी में प्रदूषण को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस नदी पर 34 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है जिसमें से 12 दिल्ली में हैं।

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