उत्तर प्रदेश

मुस्लिम धर्मगुरु बोले, पाप है महिलाओं का अकेले हज पर जाना

हज के लिए महिलाओं के अकेले जाने की अनुमति देने से संबंधित केंद्र सरकार की सिफारिश की मौलानाओं ने तीखी आलोचना की है। सुन्नी बरेलवी धर्मगुरु ने इस कदम को गैर इस्लामिक करार दिया है। उनका कहना है कि महिलाएं हज पर तभी जा सकती हैं जब वह अपने किसी रक्त संबंध वाले पुरुष सदस्य के साथ हज पर जाएं। महिलाओं का अकेले हज जाना शरीयत के खिलाफ है।

आला हजरत दरगाह के मौलाना मोहम्मद सलीम नूरी ने भी कहा कि महिलाएं अकेले हज जाएंगी तो यह पाप होगा। उनका कहना है कि हज पांच स्तंभों पर टिका हुआ है। उसी में से एक हज है। महिला मेहरम (करीबी पुरुष रक्त संबंध) के बिना हज करने नहीं जा सकती हैं।

महिलाओं को अकेले हज जाने देने की अनुमति के लिए एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अफजल अमानुल्ला ने केंद्र सरकार से अपील की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मसले पर गंभीर विचार किया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हज कमिटी ऑफ इंडिया इस बारे में विचार कह रही है कि 45 वर्ष से ऊपर की महिला अगर अपने किसी करीबी पुरुष सदस्य के बिना ही हज जाना चाहती हैं तो उसे इसकी अनुमति मिल जाए।

दरअसल केंद्र सरकार ने शनिवार को नई हज नीति पेश की थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए सब्सिडी की व्यवस्था खत्म करने और 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत देने का प्रस्ताव किया गया। हज नीति 2018-22 में हज यात्रियों को समुद्री मार्ग से भेजने के विकल्प पर काम करने की बात की गई।

इसके तहत अब 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बिना मेहरम के हज पर जा सकेंगी, हालांकि वे चार महिलाओं के समूह में जा सकेंगी। मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 किए जाने का भी प्रस्ताव है। मेहरम उसे कहते हैं जिससे महिला का निकाह नहीं हो सकता। मसलन, पिता, सगा भाई, बेटा और पौत्र-नवासा मेहरम हो सकते हैं।

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