फिल्म में भी नहीं मिलेगी हसीना की यह कहानी

मुंबई: हसीना पारकर पर शुक्रवार को आ रही फिल्म में एक संवाद है–‘ मुंबई में भाई तो बहुत बने, पर आपा सिर्फ एक ही है।’

आपा यानी हसीना पारकर। हसीना दाऊद की बहन से आपा कैसे बनी और मुंबई में लोगों के बीच उसकी दहशत कैसे बढ़ी, इसकी कहानी बहुत लंबी है।

करीब एक दशक पहले हसीना को एक केस में मुंबई पुलिस मुख्यालय नियमित आना होता था।

जब वह पहली बार वहां आई, उसी दौरान एक बिल्डर भी किसी केस में मुख्यालय आया हुआ था।

बिल्डर हसीना के दरबार में कभी हाजिरी लगा चुका था, पर उसे हसीना के वहां आने के बारे में जरा भी भनक नहीं थी,

इसलिए एकाएक जब पुलिस मुख्यालय स्थित क्राइम ब्रांच की यूनिट वन के गेट और तब के हफ्ता निरोधक प्रकोष्ठ (यहां अब नई इमारत बन गई है ) के दफ्तर के बीच वाली जगह पर संबंधित बिल्डर हसीना के सामने आ गया तो क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी का दावा है कि उसे देखते ही बिल्डर की पूरी पैंट गीली हो गई थी।

पारकर जुबान नहीं सिर्फ उसकी आंखें बोलती थी। आंखें ऐसी खतरनाक थीं कि इंसान डर जाए ।

वह बिल्डर सिर्फ उसकी आंखें देखकर ही इतना डर गया था। वह फोन पर बहुत कम बात करती थी, सिर्फ घर में दरबार लगाती थी।

हसीना दाऊद की बहन थी, पर उसका दावा था कि वह मूलत: हफ्ताखोर नहीं थी। उसने अपने हफ्ताखोर बनने की कहानी खुद ही क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी को बताई थी।

हसीना के अनुसार, एक बार दाऊद के कुछ गुर्गे उसके पास आए। गुर्गों ने उससे (हसीना से) कहा कि हम एक पार्टी को लाने वाले हैं।

आपको कुछ नहीं करना है। बस उन लोगों को इतना ही बोलना है कि जो ये लोग (गुर्गे लोग) बोलें, वही करो। हसीना ने वही बोला ।

कुछ देर बाद संबंधित पार्टी और गुर्गों की तरफ से हसीना को 25 लाख रुपये पहुंचा दिए गए।

हसीना ने सोचा कि हमने तो कुछ भी किया नहीं, फिर भी 25 लाख रुपये मिल गए। इसी के बाद उसे हफ्ता लेने का चस्का लग गया।

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, एक बार हसीना के दामाद को छोटा राजन के नाम पर तीन करोड़ रुपये के हफ्ते का फोन आया।

इस बारे में जब डीके राव से पूछा गया, तो उसने कहा कि राजन ऐसा नहीं कर सकता। इसके बाद शक फरीद तनाशा पर गया।

फरीद से पूछताछ हुई, तो उसने दामाद को फोन करने की बात से साफ मना कर दिया। फिर फरीद की हसीना के दामाद से बात कराई गई, लेकिन दामाद फरीद की आवाज पहचान नहीं पाया। इसके बाद हसीना ने खुद राजन को फोन घुमाया।

राजन ने हसीना से कहा कि मेरी तुम्हारे भाई (दाऊद) से दुश्मनी है, तुमसे नहीं। मैंने तुमसे राखी बंधवाई है।

मैं तुम्हें धोखा नहीं दे सकता। इसके बाद जांच हुई, तो पता चला फरीद ही उस धमकी वाले फोन में शामिल था।

फरीद का मर्डर क्यों हुआ, इसकी अलग कहानी है । जो लोग फरीद को नहीं जानते, उनके लिए बताना जरूरी है कि वह पाकिस्तान और पाकिस्तान के बाहर दाऊद के मारने की आधा दर्जन से ज्यादा कोशिश कर चुका था।

हसीना के कुल चार बच्चे हैं- दो लड़के- दानिश तथा अलीशा और दो लड़कियां- खुशिया तथा उमेरा । दानिश की एक सड़क दुर्घटना में कुछ साल पहले मौत हो गई थी।

यह सबको पता है कि 1991 में हसीना के पति इब्राहिम पारकर का अरुण गवली के 4 शूटरों ने मर्डर कर दिया था। अभी तक यही कहानी चल रही थी कि इब्राहिम की हत्या इसलिए हुई थी,

क्योंकि दाऊद ने अरुण गवली के भाई पापा गवली का मर्डर करवा दिया था, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनबीटी को बताया कि हकीकत इससे अलग है।

इब्राहिम खुद एक समानांतर हफ्ते का रैकेट चला रहा था। किसी होटल के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में गवली गिरोह के लोगों ने उसका कत्ल कर दिया था।

दाऊद गैंग और गवली गिरोह के बीच कई महीनों तक चले गैंगवार के बावजूद हसीना ने क्राइम ब्रांच अधिकारियों को बताया था कि उसके बच्चों और गवली की बेटी के बीच वैसी रंजिश या बदले की भावना कभी नहीं रही।

यदि हसीना के दावों पर यकीन करें तो उसके और गवली की बेटी का एक दूसरे के घर आना जाना भी था।

क्राइम ब्रांच में लंबे समय तक रहे एक सेवानिवृत अधिकारी ने एनबीटी को बताया कि सिर्फ गवली या राजन ही नहीं, दाऊद के जितने भी दुश्मन गैंग थे- यहां तक कि पठान गैंग (जिसने उसके भाई शब्बीर का कत्ल किया था) के लोग भी- उसे अपनी बहन की तरह ही इज्जत देते थे।

अरुण गवली पर पिछले सप्ताह ही फिल्म प्रदर्शित हुई है, जिसमें अर्जुन रामपाल ने गवली का किरदार निभाया है। इस शुक्रवार को आ रही फिल्म में श्रद्धा कपूर ने हसीना का रोल किया है।
हसीना के भाई दाऊद को तमाम मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही है। उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भी घोषित किया जा चुका है,

लेकिन खुद हसीना अपने भाई को इतना बुरा नहीं मानती थी। वह कहती थी कि मेरे भाई ने किसी निर्दोष को नहीं मारा।

जब उसे 1993 के बम धमाकों की याद दिलाई गई, तो उसने मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी को जवाब दिया था कि यह काम मेरे भाई ने अपनी मर्जी से नहीं किया था,

बल्कि आईएसआई वालों ने जबरन करवाया था। यदि मेरा भाई ऐसा नहीं करता तो आईएसआई वाले या तो उसे मार देते या उसे पाकिस्तान से भगा देते।

हसीना दाऊद से फोन से नहीं, बल्कि नेट कॉलिंग के जरिए संपर्क में रहती थी। वह उससे सीधे बात भी नहीं करती थी, बल्कि छोटा शकील के जरिए अपना संदेशा भिजवाती थी।

वह खुद को भी बुरा इंसान नहीं मानती थी। उसके खिलाफ मुंबई पुलिस में सिर्फ दो ही केस दर्ज हैं। वह कभी गिरफ्तार भी नहीं हुई।

हफ्ता वसूली से जुड़े एक केस में गिरफ्तारी की नौबत आने को थी, तो उसने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दे दी थी। 25 मई, 2007 को उसे जमानत मिल गई थी।

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, नागपाड़ा में हफ्ता वसूली से जुड़ा एक और भी केस था, जिसमें पुलिस ने दो आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की थी,

लेकिन हसीना को उस केस का आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाया गया था। कोर्ट ने सीआरपीएसी के सेक्शन 319 के तहत हसीना का नाम भी आरोपी के तौर पर केस में जोड़ दिया था।

अपने पापों, अपनी दहशत को छिपाने और अपनी अच्छी इमेज बनाने के लिए वह बीच- बीच में कुछ अच्छे काम भी कर लिया करती थी। कुछ साल पहले जब कश्मीर में भूकंप और बाढ़ आई थी, तो वह मुंबई से मदद करने के लिए वहां गई थी। उसकी 2014 में बीमारी की वजह से मौत हो गई थी।

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