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मां-बेटी ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर किया खुदकुशी का प्रयास, किशोरी की मौत

गाजियाबाद. गाजियाबाद के कविनगर इलाके में एनएच-24 के पास बने महागुनपुरम में एक मां-बेटी ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर खुदकुशी का प्रयास किया, जिसमें 11 साल की किशोरी की तो जान चली गयी लेकिन मां बच गयी. मां ने दोनों हाथों की नसें काट ली थी.

गाजियाबाद. गाजियाबाद के कविनगर इलाके में एनएच-24 के पास बने महागुनपुरम में एक मां-बेटी ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर खुदकुशी का प्रयास किया, जिसमें 11 साल की किशोरी की तो जान चली गयी लेकिन मां बच गयी. मां ने दोनों हाथों की नसें काट ली थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. हालांकि अभी इस मामले में किसी की ओर से तहरीर नहीं दी गई है. अस्पताल में भर्ती मां की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है. हालांकि मां ने पुलिस के सामने अपना बयान जरूर दे दिया है.

मूलरूप से चंडीगढ़ की रहने वालीं विनिता रावत का 5 साल पहले अपने पति से तलाक हो गया था जिसके बाद वह नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करने लगीं. बाद में उन्होंने दादरी के कैब ड्राइवर विक्रम सिंह से शादी कर ली. विक्रम पहले से ही शादीशुदा था. लगभग दो साल पहले विनिता ने महागुनपुरम में फ्लैट लिया और अपनी बेटी मेहुल (11) के साथ नर्मदा टावर की फ्लैट संख्या 1981 में रहने लगीं. लगभग दो साल पहले विनिता की नौकरी छूटने के बाद वह परेशान रहने लगीं.

विक्रम खर्च के लिए पैसे नहीं देता था और अपनी पहली पत्नी के साथ दादरी में ज्यादा रहता था. विनिता न तो फ्लैट की किश्त दे पा रही थीं और न ही बेटी के स्कूल की फीस. इसी वजह से विनिता ने बेटी के साथ खुदकुशी करने का प्रयास किया. रविवार की सुबह विनिता ने अपने हाथ की नसें काट लीं. यह देख बेटी रोने लगी. इस पर विनिता ने उसे भी खुदकुशी करने को कहा. मां के कहने पर मेहुल ने फांसी लगा ली.

सुबह लगभग 9 बजे विक्रम फ्लैट पर पहुंचा तो कई बार खटखटाने पर भी दरवाजा नहीं खुला. इस पर वह बराबर वाले फ्लैट की बालकनी से विनिता के फ्लैट की बालकनी में पहुंचा. अंदर हर तरफ खून फैला हुआ था. विनिता एक कमरे में बेहोश पड़ी थीं और मेहुल फांसी के फंदे पर लटक रही थी. विक्रम ने मेहुल को फंदे से नीचे उतारा और सोसायटी के गार्ड की मदद से दोनों को कोलंबिया एशिया अस्पताल पहुंचाया. यहां डॉक्टरों ने मेहुल को मृत घोषित कर दिया, जबकि विनिता की हालत गंभीर बनी हुई है.

होश में आने पर विनिता ने पुलिस को बताया कि वह आर्थिक तंगी और पति के धोखे से पूरी तरह टूट चुकी थी. वह अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहती थीं. नौकरी छूटने के बाद से उनके पास खाने के भी पैसे नहीं बचे थे. शनिवार की रात उसने बेटी के साथ खुदकुशी की योजना बनाई थी. पहले उन्होंने तय किया कि वे फांसी लगाकर खुदकुशी करेंगी. इसके लिए उन्होंने दो फंदे तैयार भी किए, लेकिन फिर पहले कौन खुदकुशी करेगा, इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका जिसके बाद फांसी लगाने का निर्णय बदलकर फिनाइल पीकर जान देने की योजना बनाई, लेकिन फंदे नहीं उतारे गए.

विनिता ने बताया कि घर में रखी फिनाइल की बोतल को दोनों ने आधा-आधा पिया. इसके बाद वे दोनों यह मानकर सो गए कि रात में दोनों की मौत हो जाएगी, लेकिन सुबह उनकी नींद खुल गई. इस पर दोनों को अफसोस हुआ. सुबह लगभग 8 बजे विनिता सोसायटी में बनी दुकान से मेहुल के पसंदीदा बिस्किट और एक ब्लेड लेकर आईं. विनिता ने मेहुल को बिस्किट खाने को दिए और खुद दूसरे कमरे में पहुंचकर ब्लेड से अपने दोनों हाथों की नसें काट लीं.

इस दौरान विनिता ने विक्रम के दोस्त को फोन करके खुदकुशी करने की जानकारी दे दी. इधर बिस्किट खाने के बाद जब मेहुल उस कमरे में आई तो खून फैला देखकर रोने लगी. इस पर विनिता ने उससे कहा कि मैं तो अब मर जाऊंगी, मेरे बाद तेरा क्या होगा, तू कैसे और किसके सहारे जिएगी, तू भी फांसी लगाकर खुदकुशी कर ले. इस पर मेहुल ने सोफे पर चढ़कर फांसी लगा ली.

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