राष्ट्रीय

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के सामने छुपा बनारस के घाटों का जख्म

वाराणसी: सोमवार को फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बनारस के घाटों की जीवंतता देखने आए. उनके स्वागत के लिए बनारस के घाट सजकर तैयार थे. कला और संस्कृति के साथ बनारस के घाटों के वैभव से भी वे परिचित हुए. लेकिन घाटों के कई टूटे हिस्से उनकी नजरों से छुपा लिए गए. पीएम और राष्ट्रपति की निगाह न पड़ सके इसके लिए प्रशासन ने टूटे घाटों की सीढ़ियों को मैट और स्वागत की होर्डिंग लगाकर छुपा दिया था.

बनारस के लोगों में रोष है कि इन घाटों का सुधार नहीं हो रहा है. इसे ऐसे ही नजरअंदाज़ किया जा रहा है. काशी के निवासी अवधेश दीक्षित कहते हैं ” हमने ये देखा कि घाटों के चित्र को बदलकर गलत चित्र दिखाया जा रहा है. जो वास्तविक चित्र है उसे छिपाया जा रहा है. सीढ़ियां दरकी हुई हैं. उनके ऊपर उसी रंग का कार्पेट बिछा दिया गया है जिस रंग के पत्थर होने चाहिए. यह मतलब है कि जस का तस देखिए, उन चीजों को बने रहने में क्या दिक्कत है.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति अस्सी घाट से राजेंद्र प्रसाद घाट तक के तकरीबन 40 घाटों से गुजरे. इन घाटों पर उनके स्वागत के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम तो हो रहे थे लेकिन बनारस के लोग इस बात को भी देख रहे थे कि कैसे हकीकत को छिपाया गया है जो अस्सी घाट के बगल में तुलसी घाट की टूटी सीढ़ियां से शुरू होकर बाद के प्रभु घाट, ललिता घाट सहित तकरीबन आधा दर्जन घाटों तक दरकती सीढ़ियों और चबूतरों के रूप में है. प्रशासन ने बड़ी खूबी से गंगा में गिर रहे नालों को भी ढंक दिया था.

congress cg advertisement congress cg advertisement
Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.