उरुग्वे टीम को जीत का मंत्र देते है 71 साल के तबरेज

ऑस्क तबरेज गुलियन बैरे सिंड्रोम नामक एक खतरनाक बिमारी से जूझ रहे हैं

स्पोर्ट्स डेस्क। विश्वकप में उरूग्वे टीम का जलवा रहा है उसने अपने जबरदस्त प्रदर्शन को सभी चौंकाने का किया है । बता दें की वह टूर्नामेंट की मात्र एक ऐसी टीम हैजिसने ग्रुप की लगातार तीनों मैच जीते हैं ।

और जिसके खिलाफ अब तक कोई गोल नहीं हुआ है। वैसे इस बार ही नहीं वह 1930,1950,1954 और 2010 में विश्वकप में ग्रुप दौर का अंत सभी मैचों में क्लीनशीट के साथ किया था। पर आप भी इस बात से चौंक सकते हैं

कि उरुग्वे की इस सफलत के बाच एक इंसान का हाथ है। जो बैशाखी के सहारे चलता है और टचलाइन से लगातार खिलाड़ियों को ऊंची आवाज में निर्देश भी देता है । बता दें की यह शख्स कोई और नहीं, उरुग्वे का कोच, ऑस्क तबरेज है।

वह वर्ल्डकप के सबसे उम्रदराज कोच हैं । 71 साल के तबरेज एक खतरनाक बिमारी से जूझ रहे हैं । पर उनका उत्साह गजब हैं । बता दें की उन्हें गुलियन बैरे सिंड्रोम नामक गंभीर बिमारी है ।

गुलियन बैरे सिंड्रोम एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी के शरीर में पहले सिहरन या दर्द होने लगता है और फिर उसके बाद उसकी मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं ।

लक्षण पता लगते ही इलाज न होने की ब्रीदिंग मसल्स तक कमजोर हो जाती है ।कई बार मरीज को लकवा तक हो जाता है । ऑस्कर के कोच रहते उरूग्वे की टीम ने 2010 विश्वकप में सेमीफाइनल का सफर तय किया था । डिफेंडर के तौर पर वह उरूग्वे के लिए खेल चुके हैं और 2006 में से टीम के कोच है।

उन्होंने 1980 में रिटायरमेंट के एक साल बाद ही उरूग्वे के क्लब बेला विस्टा के कोच बन गए ते । कोच के तौर पर ऑस्कर ने 2006 से अब तक यानी 25 जून 2018 तक 155 मैचों में 77 में जीत दिलाई है। 39 मैच ड्रॉ रहे हैं और इतने ही मैच गंवाए हैं।

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