अमेरिकी नौसैनिक मृत्यु के 74 साल बाद घर लौटा

72 हजार नौसैनिकों में से एक रिचार्ड मर्फी जुनियर हैं उन्हीं नौसैनिकों में से हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लापता हो गए थे। साल 1944 को जून महीने में उत्तरी मारियानास में साइपन के प्रशांत तट पर उन्हें मारा गया था।

उस वक्त उनकी उम्र 26 वर्ष थी। उनके शव को काफी खोजा गया लेकिन वह नहीं मिला।

बाद में पता चला कि उन्हें फिलीपींस में अमेरिकी कब्रिस्तान में दफनाया गया था। इस साल डिफेंस विभाग ने उनकी पहचान पता की।

मर्फी के शव को शनिवार को वहीं लाया गया जहां वह जन्मे थे। अब उनके शव को उनकी मां के शव के साथ दफनाया गया है।

मर्फी के भतीजे का कहना है कि वह उनके दिल में हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने मर्फी के शव के वापस आने को बेहद खूबसूरत और अच्छा बताया।

पियानो के थे शौकीन

मर्फी कोलंबिया के जिले में पैदा हुए थे। चार बहन भाईयों में वह सबसे छोटे थे। वह काफी बातूनी और हंसमुख स्वभाव के थे।

उन्हें पियानो बजाना बेहद पसंद था। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने एक अखबार में काम किया। उन्होंने कई लेख भी लिखे।

इसके बाद उन्होंने लड़ाई में हिस्सा लेने का विचार किया। वह एक आंख से देख नहीं सकते थे। मर्फी नहीं चाहते थे कि उनकी लड़ाई कोई और लड़े इसलिए वह भी जंग के मैदान में डटे रहे। मर्फी के अंतिम संस्कार में करीब 75 लोग शामिल हुए।

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