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टिलरसन-सुषमा की मुलाकात: आतंकवाद, पाकिस्तान, एच1बी वीजा समेत तमाम मुद्दों पर हुई बात

अमेरिकी विदेश मंत्री टिलरसन और सुषमा स्वराज की मुलाकात के दौरान दोनों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की है।

दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने को लेकर भी बात हुई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि भारत ने एच1बी वीजा मुद्दे से भी अमेरिका को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। भारत ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ ट्रंप प्रशासन द्वारा दिखाई जा रही सख्ती को भी परोक्ष रूप से अपना समर्थन दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और सुषमा स्वराज की मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि अमेरिका ने भारत को जिस तरह से अपना वैश्विक साझेदार बनाया है, हम उसकी तारीफ करते हैं। सुषमा स्वराज ने कहा, ‘हम अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को उच्च प्राथमिकता देते हैं।’ सुषमा स्वराज ने बताया कि सुरक्षा और आतंकरोधी मसलों पर हमारे बीच गहन विचार हुआ है। अमेरिका से कच्चे तेल की खरीदारी से हमारे ऊर्जा संबंध बढ़े हैं। अफगानिस्तान में बढ़ रही आतंकी हिंसाओं पर भी भारत ने चिंता जाहिर की है।

सुषमा ने पाकिस्तान को फिर बताया आतंक की शरणस्थली
सुषमा स्वराज ने अपने समकक्ष अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान की जमीन से चल रहे आतंकवाद पर भी चर्चा की। संयुक्त बयान में सुषमा ने बताया कि दोनों देश इस बात पर सहमत थे कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी देश आतंकवादियों को शरण न देने पाए। हम इस बात पर सहमत थे कि पाकिस्तान को अपने यहां आतंकवादियों की शरणस्थली को तुरंत खत्म करे, तभी राष्ट्रपति ट्रंप की नई रणनीति प्रभावी हो सकती है।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर हुआ विचार: सुषमा
सुषमा स्वराज ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रशांत क्षेत्र में उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। स्वतंत्र नौवहन, आबाधित व्यापार के महत्व को दोहराया गया है। भारत और अमेरिका इस बात पर सहमत थे कि अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इन सिद्धांतों के आधार पर सहयोग बढ़ाने पर विचार करेंगे। सुषमा स्वराज ने बताया कि टिलरसन के साथ रक्षा कंपनियों के बीच औद्योगिक साझेदारियों को बढ़ाने पर विचार हुआ है। कानूनी ढांचे में बदलाव कर रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी पर भी चर्चा हुई। भारतीय अर्थव्यवस्था के टिकाऊ विकास से हमारे संबंध में नए अवसर पैदा होंगे।

‘नॉर्थ कोरिया में हम अमेरिका के मित्र देश के रूप में’
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉर्थ कोरिया से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर सुषमा स्वराज ने भारत का पक्ष रखा। सुषमा स्वराज से पूछा गया कि ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया की आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए दुनियाभर के मुल्कों से प्योंगयांग से संबंध खत्म करने को कहा है। सवाल पूछने वाले ने कहा है कि नॉर्थ कोरिया के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं और दोनों देशों में एक-दूसरे के दूतावास भी हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि इस मसले को लेकर टिलरसन के साथ व्यापक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा, ‘हमारा और नॉर्थ कोरिया का ट्रेड कम हो गया है। हमारा छोटा दूतावास है वहां। मैंने टिलरसन से कहा कि कुछ मित्र देशों के दूतावास वहां रहें ताकि आपसी संवाद का रास्ता खुला रहे। मुझे लगता है कि टिलरसन ने इस बात को समझा है।’

‘एच1बी वीजा पर ऐसा कुछ न हो जिससे हमारे हितों पर आघात पहुंचे’
सुषमा ने टिलरसन से बातचीत के दौरान एच1बी वीजा का मामला भी उठाया। सुषमा बोलीं, ‘टिलरसन ने सही कहा है कि कोई भी दो देश इनोवेशन को इतना बढ़ावा नहीं दे सकते जितना अमेरिका और भारत ने बढ़ाया है। एच1बी वीजा पर भारत से अमेरिका गए लोगों पर भी बात हुई है। भारत ने कहा है कि अमेरिका द्वारा कुछ भी ऐसा नहीं किया जाना चाहिए जिससे भारत के हितों पर आघात लगे।’ सुषमा ने कहा कि इस नए बदलाव पर दो तरह से रोक लगाई जा सकती है। या तो अमेरिका में एग्जिक्युटिव ऑर्डर जारी हो या कांग्रेस के सदस्य इसे रोकें। सुषमा के मुताबिक भारत दोनों रास्तों से अपने लोगों के हितों का ध्यान रखने की कोशिश कर रहा है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम साथ-साथ: अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्री टिलरसन ने अपने प्रेस वक्तव्य में इस बात को रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच 70 सालों से अधिक का संबंध है। टिलरसन ने भारत को सहज साथी बताते हुए संबंधों को नया आयाम देने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया कहा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने लड़ाकू विमानों एफ 16, एफ 18 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मिलिटरी आधुनिकीकरण में अमेरिका का सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने ट्रंप की नई अफगानिस्तान नीति में भारत को अहम अंग बताया। टिलरसन ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

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