कासगंज हिंसा को राज्यपाल राम नाईक ने बताया कलंक, मायावती सरकार पर बरसीं

महाराणा प्रताप के परिनिर्वाण दिवस के मौके पर राज्यपाल ने कहा कि कासगंज की घटना किसी के लिए भी शोभादायक नहीं है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को कासगंज हिंसा को सूबे के लिए कलंक करार दिया. उन्होंने हिंसा को शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार से कहा कि प्रशासनिक मशीनरी को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे ऐसी घटनाएं फिर से ना हो.

वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने हिंसा को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया. महाराणा प्रताप के परिनिर्वाण दिवस के मौके पर राज्यपाल ने कहा कि कासगंज की घटना किसी के लिए भी शोभादायक नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘जो कासगंज में हुआ वह किसी को भी शोभा नहीं देता. वहां जो घटना हुई है, यूपी के लिए कलंक के रूप में हुई है. सरकार उसकी जांच करा रही है. सरकार ऐसे कदम उठाए कि फिर से ऐसा न हो.’

इस बीच, बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि सूबे में जंगलराज फैला है. इसका ताजा उदाहरण कासगंज की घटना है, जहां हिंसा की आग अब भी शांत नहीं हुई है. बसपा इसकी कड़ी निंदा के साथ-साथ दोषियों को सख्त सजा देने की मांग करती है.

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उन्होंने कहा कि खासकर भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान तथा महाराष्ट्र आदि में अपराध-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनहित तथा विकास का बुरा हाल है.

इससे यह साबित होता है कि भाजपा एंड कंपनी का हर स्तर पर घोर अपराधीकरण हो गया है. सपा उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कासगंज की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि हमेशा चुनाव के पहले दंगा होता है.

मुजफ्फरनगर में भी लोकसभा चुनाव से पहले दंगा हुआ था. कासगंज में भी दंगा हुआ. चुनाव से पहले ही क्यों दंगा होता है, इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.

गणतंत्र दिवस पर विश्व हिन्दू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा कासगंज के बड्डूनगर में मोटरसाइकिल रैली निकाले जाने के दौरान दो पक्षों के बीच पथराव और गोलीबारी हुई थी. इसमें एक युवक की मौत हो गई थी और एक अन्य जख्मी हो गया था.

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