वास्तु

वास्तु शास्त्र : निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव एनर्जी में बदलने घर में लाएं ये 10 बदलाव

घर की निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव एनर्जी में बदलने का काम वास्तु शास्त्र करता है। वास्तु शास्त्र में ऐसे कई प्रोडक्ट मिलते हैं जो घर की हवा को शुद्ध बनाते हैं। इसके अलावा वास्तु नियमों का पालन करते हुए भी हम खुशहाल जीवन पा सकते हैं। यहां हम आपको वास्तु के सबसे सरल, आवश्यक और प्रभावी नियम बताने जा रहे हैं। नया साल 2019 प्रारंभ होने से पहले ही इन नियमों का पालन करें ताकि नववर्ष में आप सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सकें।

1. शुरुआत करें पूजा घर से। घर का मंदिर या फिर में जिस स्थान पर बैठकर हम पूजा करते हैं, उसका वास्तु दोष रहित होना बेहद जरूरी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा करते समय हमारा मुख उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसलिए कोशिश करें कि पूजा घर भी इसी दिशा में हो।

2. अब बात करें प्रवेश द्वार की। यह वह स्थान है जहां से घर की निगेटिव एनर्जी बाहर जाती है और पॉजिटिव एनर्जी घर के भीतर आती है। मुख्य द्वार उत्तर दिशा में होना चाहिए। प्रवेश द्वार के आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए।

3. सकारात्मक ऊर्जा पाने के लिए प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं। दरवाजे पर मां लक्ष्मी का पद्म चिह्न या फिर पवित्र स्वास्तिक बनाएं। इससे घर में शुभ वायु का प्रवेश होता है।

4. एक और बात का ध्यान रखें, घर का प्रवेश द्वार कहीं से टूटा हुआ नहीं होना चाहिए। यदि दरवाजा खोलते या बंद करते समय अनचाही आवाज आ रही हो, तो उसे जल्द से जल्द ठीक कराएं। वास्तु अनुसार प्रवेश द्वार का दोष रहित होना अनिवार्य है।

5. घर का लिविंग एरिया, ऐसा स्थान जहां परिवार के लोग अक्सर एकत्रित होते हैं वहां लाइट की कमी नहीं होनी चाहिए। यहां सुगन्धित फूल या पौधे भी होने चाहिए। इस जगह पर तीखी-नुकीली चीजें ना रखें।

6. संभव हो तो घर के लिविंग एरिया में वास्तु शास्त्र का ‘पिरामिड’ प्रोडक्ट रखें। यह इस एरिया में पॉजिटिव एनर्जी लाएगा। जिसकी बदौलत इस एरिया में बैठने वाले परिवार के सदस्यों को तन और मन की शांति प्राप्त होगी।

7. अगला है घर का बाथरूम। घर के बाथरूम का दरवाजा हमेशा उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर खुलना चाहिए। बाथरूम में गहरे रंग की टाइल या पेंट का इस्तेमाल हो। इसे हमेशा साफ रखें। फ्लोर पर पानी नहीं होना चाहिए।

8. घर के बाथरूम में यदि वास्तु दोष है तो यहां भी वास्तु पिरामिड लगाना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि बाथरूम की पानी की निकासी किस दिशा में जा रही है। अगर बाथरूम कोई इस्तेमाल ना कर रहा हो तो इसका दरवाजा हमेशा बंद रखें।

9. रसोईघर की दिशा उत्तर में होनी चाहिए। जिस जगह पर चूल्हा जले वह भी उत्तर में हो। जिस जगह पीने वाले पानी का प्रबंध हो, उसकी दिशा उत्तर-पूर्व या पूर्व होनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर के दोष रहित होने से घर की कई सारी मुसीबतें अपने आप ही टल जाती हैं।

10. अंत में बात करते हैं बेडरूम की। बेडरूम की दिशा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व होने चाहिए। बेडरूम में बेड किस जगह लगा है इसकी दिशा का भी ध्यान रखें। सोते समय आपके पांव दक्षिण दिशा की ओर नहीं जाने चाहिए। बेडरूम में हलके रंगों का इस्तेमाल करें।

Summary
Review Date
Reviewed Item
वास्तु शास्त्र : निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव एनर्जी में बदलने घर में लाएं ये 10 बदलाव
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags