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वैष्णो देवी मंदिर में नज़र आएगी कौमी एकता की मिसाल व मुस्लिम कारीगरों का हुनर

नए दरवाजे के एक पल्ले पर माता लक्ष्मी और दूसरे पर आरती उकेरी गई

कोटा:वैष्णो देवी मंदिर में सोने का दरवाजा लगाया गया है. 96 फीट लंबी पारंपरिक गुफा के इस दरवाजे को 29 सितंबर से शुरू हो रही नवरात्र में लगाया गया. इससे पहले गुफा के बाहर संगमरमर का दरवाजा होता था.

यह पारंपरिक गुफा सिर्फ सर्दियों में कुछ दिनों के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोली जाती है। हालांकि हर दिन पुजारी आरती के लिए इसी पारंपरिक गुफा वाले दरवाजे का इस्तेमाल करते हैं। सोने के इस नए दरवाजे के एक पल्ले पर माता लक्ष्मी और दूसरे पर आरती उकेरी गई है.

मुस्लिम कारीगरों ने किया देवी के दरबार को सोने से सजाने का काम

कोटा जिले के कारीगरों का हुनर और क़ौमी एकता की मिसाल वैष्णो देवी मंदिर में नज़र आ रही है. देवी के दरबार को सोने से सजाने का काम कोटा के मुस्लिम कारीगरों ने किया है. वैष्णो देवी मंदिर में सोने का दरवाजा लगाया गया है.

हालांकि हर दिन पुजारी आरती के लिए इसी पारंपरिक गुफा वाले दरवाजे का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा इस पर भगवान गणपति की तस्वीर और मंत्र हैं. दरवाजे के ऊपरी हिस्से में गुंबद और छत्र हैं, जिस पर नौ सीढ़ियां बनाई गई हैं जो नौ देवियों का प्रतीक हैं.

इस दरवाजे को कारीगरों ने तीन महीने में तैयार किया है. इसे बनाने के लिए श्राइन बोर्ड ने उन कारीगरों को बुलाया था जिन्होंने इससे पहले मुंबई में सिद्धिविनायक और दिल्ली में झंडेवालान मंदिर में नक्काशी का काम किया है.

कोटा के स्टेशन इलाके के महात्मा गांधी कोलोनी के निवासी कय्युम बेग ओर उनके परिवार ने एक महीने तक कढ़ी मेहनत से सोने चांदी के इस काम को किया है. कारीगरों ने गुफा के पास दरवाज़े के साथ साथ छत्र ध्वजा आरती, कलश, जय माता दी लिखा बोर्ड सहित कई जगह सोने के लेप का काम किया है. इसमें 12 किलो सोने के बिस्कुट के वर्क बना कर काम किया है.

12 किलो सोने के पहले वर्क बनाए गए उसके बाद उन्हें चढ़ाया गया. इस काम को करने में कौमी एकता की मिसाल दे रहे कय्युम के पूरे परिवार ने जी जान से लग कर देवी के दरबार मे अपने हुनर को पेश किया. कय्युम के अलावा उनके परिवार के ज़ाकिर बेग, वाज़िद, फ़ैज़ान, दीपु, ताहिर, इक़बालओर अख़लाक़ ने इस काम को किया है.

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