कांग्रेस का 84वां महाधिवेशन के शुरुआत से ही पार्टी में कई बदलाव

कांग्रेस का 84वां महाधिवेशन 17 मार्च को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शुरु हुआ। राहुल गांधी की अध्यक्षता में यह पहला अधिवेशन लेकिन पहले दिन ही पार्टी में कई बदलाव देखने को मिले

कांग्रेस का 84वां महाधिवेशन 17 मार्च को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शुरु हुआ। राहुल गांधी की अध्यक्षता में यह पहला अधिवेशन लेकिन पहले दिन ही पार्टी में कई बदलाव देखने को मिले। यह शुरूआत कई मामलों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। इतना ही नहीं कांग्रेस के विरोधियों ने इस बदलावा पर निशाना भी साधा है। सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट नए अवतार में नजर आया।

पहले यह ऑफिस ऑफ आरजी नाम से था जिसे अधिवेशन से ठीक पहले बदलकर राहुल गांधी कर दिया गया। बदलाव की दूसरी निशानी महाधिवेशन के मंच पर दिखी। पार्टी के सभी नेताओं को मंच की सतह पर गद्दे और मसलंद के साथ न बिठाकर मंच के नीचे सामने कुर्सी पर बैठाया गया था। मंच को नए लुक और नए ब्रांड में सजाया गया था। इसके साथ ही अपने उद्घाटन संबोधन में राहुल ने सिर्फ चार मिनट का ही भाषण दिया।

पार्टी में नए और पुराने नेताओं के बीच सामंजस्य बिठाने की भरपूर कोशिश की गई है और उस बावत संदेश भी दिया गया है। शायद यही वजह रही कि राहुल गांधी के तुरंत बाद लोकसभा की पूर्व स्पीकर और दलित नेता मीरा कुमार ने अपना भाषण दिया। राहुल गांधी ने अपने संक्षिप्त भाषण में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी नफरत और विभाजन की राजनीति करती है जबकि हम प्यार की राजनीति करते हैं। पार्टी ने पुराने अधिवेशनों से हटकर ना सिर्फ मंच को खाली रखा बल्कि टीवी चैनलों की तरह पैनल डिसकसन भी कराया, जिसमें युवा और वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया, कम्यूनिकेशन और विरासत पर चर्चा की। महाधिवेशन में कार्यकर्ता अपना जुड़ाव महसूस करें, इसलिए उसे रोचक बनाने की भी कोशिश की गई है।

राहुल गांधी की अध्यक्षता में पहला लेकिन कांग्रेस का 84वां महाधिवेशन 17 मार्च को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शुरु हुआ। अधिवेशन के पहले दिन ही पार्टी में कई बदलाव देखने को मिले। यह शुरूआत कई मामलों में राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। इतना ही नहीं कांग्रेस के विरोधियों ने इस बदलावा पर निशाना भी साधा है। सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट नए अवतार में नजर आया। पहले यह ऑफिस ऑफ आरजी नाम से था जिसे अधिवेशन से ठीक पहले बदलकर राहुल गांधी कर दिया गया। बदलाव की दूसरी निशानी महाधिवेशन के मंच पर दिखी। पार्टी के सभी नेताओं को मंच की सतह पर गद्दे और मसलंद के साथ न बिठाकर मंच के नीचे सामने कुर्सी पर बैठाया गया था। मंच को नए लुक और नए ब्रांड में सजाया गया था। इसके साथ ही अपने उद्घाटन संबोधन में राहुल ने सिर्फ चार मिनट का ही भाषण दिया।

पार्टी में नए और पुराने नेताओं के बीच सामंजस्य बिठाने की भरपूर कोशिश की गई है और उस बावत संदेश भी दिया गया है। शायद यही वजह रही कि राहुल गांधी के तुरंत बाद लोकसभा की पूर्व स्पीकर और दलित नेता मीरा कुमार ने अपना भाषण दिया। राहुल गांधी ने अपने संक्षिप्त भाषण में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी नफरत और विभाजन की राजनीति करती है जबकि हम प्यार की राजनीति करते हैं। पार्टी ने पुराने अधिवेशनों से हटकर ना सिर्फ मंच को खाली रखा बल्कि टीवी चैनलों की तरह पैनल डिसकसन भी कराया, जिसमें युवा और वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया, कम्यूनिकेशन और विरासत पर चर्चा की। महाधिवेशन में कार्यकर्ता अपना जुड़ाव महसूस करें, इसलिए उसे रोचक बनाने की भी कोशिश की गई है।

महाधिवेशन से पहले कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार की सच्चाई से अवगत कराने वाले बुकलेट भी बांटे गए हैं ताकि वो गांव-गांव जाकर उनकी चर्चा कर सकें। इसके साथ ही महाधिवेशन के दौरान पेश किये गये राजनीतिक प्रस्ताव में कांग्रेस ने आगामी आम चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का खुलासा किया है। दो दिवसीय महाधिवेशन में इस प्रस्ताव पर विस्तृत विचार विमर्श कर इसे अपनाया जाएगा। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पेश किये गये इस प्रस्ताव को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी के माध्यम से पार्टी लोकसभा सहित अगले चुनावों में अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की अपनी दिशा निर्धारित करेगी।

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