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उत्तर कोरिया के जेल में बंद कैदियों के साथ होता है बहुत बुरा सलूक : संस्था

इस रिपोर्ट में 2014 के संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए तथ्यों को भी शामिल किया

फियोंगयांग: उत्तर कोरिया के कुछ पूर्व अधिकारियों और बंदियों से बातचीत के आधार पर ह्यूमैन राइट्स वॉच नाम की संस्था एचआरडब्ल्यू ने 88 पन्नों की रिपोर्ट जारी कर बताया कि उत्तर कोरिया के जेल में बंद कैदियों के साथ बहुत बुरा सलूक किया जाता है.

इस रिपोर्ट में 2014 के संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए तथ्यों को भी शामिल किया है. इस रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि वर्ष 2011 में यहां की सत्ता पर ​सुप्रीम लीडर किम जोंग उन के काबिज होने के बाद कैदियों की हालत बहुत खराब हुई है.

संयुक्त राष्ट्र के कार्यकर्ताओं ने किम जोंग और उनके सिक्योरिटी चीफ की हरकतों को हिटलर के शासनकाल के दौरान हुए अत्याचार से तुलना की है. रिपोर्ट में कैदियों को दी जाने वाली यातनाओं में भूखा रखने से लेकर उनकी हत्या तक करवाने की बात सामने आई है.

और अधिकारियों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है रिपोर्ट यह रिपोर्ट 8 पूर्व सरकारी अधिकारियों और 22 पूर्व बंदियों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है. एचआरडब्ल्यू ने बताया कि वहां बंदियों के साथ जानवरों से बदतर व्यवहार किया जाता है और अंतत: उसे पशु ही बना डालते हैं.

इस संस्था के एशिया के निदेशक ब्रैड एडम्स ने बताया कि कैदियों को हमेशा सिस्टम का डर लगा रहता है कि वह इसके दलदल में एक बार अगर फंस गए तो फिर रिश्वत देकर ही इससे बाहर आ सकते हैं.

कैदियों को 16 घंटे तक सिर झुकाकर जमीन पर बैठना पड़ता है पूर्व बंदियों ने कहा कि उन्हें सिर झुकाकर रोजाना 7-16 घंटे तक जमीन पर बैठे रहना पड़ता है. आंखें जमीन की ओर रखनी होती है. ऐसा नहीं करने पर गार्ड कैदियों को कुछ भी सजा दे सकते हैं.

दक्षिण कोरिया भागने की कोशिश मे पकड़े गए एक सैनिक ने बताया कि उसकी रोजाना इतनी बेरहमी से पिटाई होती थी कि एक समय लगा कि अब मर जाएंगे. महिला कैदियों के साथ रेप,यौन उत्पीड़न होता है

एक पूर्व कारोबारी महिला ने बताया कि पूछताछ के दौर उसका रेप किया गया. 50 वर्षीय इस महिला ने बताया कि इतना ही नहीं मेरा यौन उत्पीड़न दो पुलिस वालों ने भी किया. उत्तर कोरिया के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि ‘जेल मैनुएल कहता है कि कैदियों की पिटाई नहीं होनी चाहिए. हालांकि, हमारे साथ शुरूआत से अपराध कबूल कराने के नाम पर पिटाई की जाती है.

तस्करी के आरोप में चार बार पकड़े गए एक शख्स ने बताया कि ‘मुझे इतना पीटा गया कि मैंने डर से गलती कुबूल कर ली. उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत ही गंदगी वाली स्थिति में रखा जाता है. बहुत कम खाना दिया जाता है, छोटे से सेल में बहुत ज्यादा भीड़ कर दी जाती है.

नहाने और कंबल के लिए तरसाया जाता है. महिला बंदियों की जरूरतों पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है. यातना भुगत चुके लोगों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जाता है कि वो आसानी से गुनाह कुबूल लें.

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