छत्तीसगढ़

धरने पर बैठे विजय केशरवानी खोया अपना आपा, विधायक पति पर बरस पड़े

पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमत का विरोध करने एक दिवसीय धरने पर बैठे थे कांग्रेसी

बिलासपुर: विजय केशरवानी ने चुनावी रोटी सेकने अपने वार्ड में डायरिया फैलने के मुद्दे को तूल दिया, जिसका कटाक्ष करते हुए सभापति शेख नजीरुद्दीन ने कड़े शब्दों में पार्षद विजय केशरवानी के होश ठिकाने लगाए लगा दिए।

गौरतलब है कि कांग्रेस कमेटी ने विजय केशरवानी को जिला कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी थी, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद विजय केशरवानी की नज़र मेयर की कुर्सी पर थी, जिसे देखते हुए उन्होंने पार्षद चुनाव में अपना भाग्य आज़माया लेकिन नसीब ने उनका साथ नही दिया, और वह चाह कर भी मेयर नही बन पाए, विजय हो कर भी अपनी पराजय का मलाल उनके दिल मे घर कर गया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी अपनी हरकतों की वजह से सुर्खिया बटोरने लगे है।

एक दिवसीय धरने के दौरान विजय केशरवानी और विधायक पति के बीच हुई कहा सुनी ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी में आपसी कलह की चिंगारी भड़का दी है।

भरी सभा मे विधायक पति आशीष सिंह पर बसे

आपको बता दें सोमवार को कांग्रेसी पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमत का विरोध करने एक दिवसीय धरने पर बैठे थे, लेकिन धरना प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही विजय केशरवानी अपना आपा खो बैठे और भरी सभा मे विधायक पति आशीष सिंह पर बरस पड़े, वीडियो देखने के बाद मामला सोशल डिस्टेंसिग मेंटेन करने का नज़र आ रहा था, पर तखतपुर विधायक पति को धरने के दौरान किस बात पर मलाल था ये स्पस्ट नही हो पाया है क्योंकि वीडियो में आवाज़ आ रही है की माइक पाए नही की शुरू हो जाते है।

”खर्चा रुपैया और आमदनी अठन्नी”

कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों के विरोध करने नेहरु चौक में आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान ”खर्चा रुपैया और आमदनी अठन्नी” की तर्ज़ पर कांग्रेसियों ने खुद अपनी फजीहत करा ली है। जिससे विपक्ष भी खूब मजे ले रहे है अगर ऐसा ही चलता रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है और 15 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद महज़ 5 साल छत्तीसगढ़ में राज करने की यादें ही कांग्रेसी बटोर सकेंगे।

क्योकि प्रदेश में बीते 15 साल भाजपा की सरकार थी, वही न्यायधानी की बात करें तो करीब 20 साल यहाँ भाजपा के पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का डंका बजता था पर शैलेष पांडेय ने बिलासपुर से भाजपा की नींव उखाड़ फेंकी। इसका मुख्य कारण बिलासपुर में सही व्यक्तित्व का चुनाव और चुनावी घोषणा पत्र था।

लेकिन कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ में एक बार फिर जीत का परचम लहराना है तो आपसी तालमेल बिठाकर चलना पड़ेगा अगर ऐसा नही हुआ तो इसका भविष्य में कांग्रेस पार्टी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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