छत्तीसगढ़

गांव पाचोरी: सिकलीगरों के बच्चों ने थामी कलम-कॉपी, हुयी नयी सुरुवात

इसमें सामाजिक संगठन सिक्खी अवेरनेस फाउंडेशन स्कॉटलैंड एवं सैफ इंटरनेशनल कै नेडा ट्रस्ट द्वारा इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जा रहा है।

अवैध हथियार निर्माण और सप्लाई के लिए देशभर में कुख्यात हो चुके सिकलीगरों के गांव पाचोरी में एक नई पौध पनप रही है।

मप्र-महाराष्ट्र की सीमा पर सतपुड़ा के घने जंगल में बसे इस गांव में रहने वाले सिकलीगरों के बच्चों ने कलम-कॉपी थामी है। यहां के बच्चे पढ़लिखकर कुछ अच्छा करना चाहते हैं।

पाचोरी में सिकलीगरों के करीब 150 परिवार रहते हैं और यहां की आबादी करीब 1000 है।

हाल ही में यहां के सिकलीगरों ने जिला प्रशासन के सामने अवैध हथियार नहीं बनाने का संकल्प लिया है। सिकलीगरों के रोजगार के लिए प्रशासन भी लगातार प्रयास कर रहा है।

उधर, यहां के बच्चे भी पढ़ाई में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खकनार गुरुद्वारे के ज्ञानी दीवानसिंहजी और समाजसेवी मनजीतसिंहजी के मुताबिक यहां के सिकलीगरों ने एक साल पूर्व जब सामाजिक संगठनों से बच्चों की अच्छी परवरिश व मदद के लिए गुहार लगाई थी तब उन लोगों ने आगे आकर उन्हें मार्गदर्शन व सहयोग दिया।

सामाजिक संगठनों की पहल को सराहकर स्कूल ने आधी की फीस :

खकनार के गुरुकुल एकेडमी में पाचोरी के करीब 193 बच्चे कक्षा पांचवीं से लेकर 12वीं तक पढ़ाई कर रहे हैं। यहां के प्राचार्य व संचालक सुनील श्रीवास्तव ने बताया बच्चों की बढ़ाई के लिए समाजसेवी तरणजीतसिंहजी मल्होत्रा ने मुहिम चलाई। उनकी मदद से सामाजिक संगठन यहां आए और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं।

इसमें सामाजिक संगठन सिक्खी अवेरनेस फाउंडेशन स्कॉटलैंड एवं सैफ इंटरनेशनल कै नेडा ट्रस्ट द्वारा इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जा रहा है। सामाजिक संगठन की पहल को स्कूल ने भी सराहा और इन बच्चों की फीस आधी कर दी। स्कूल द्वारा इन बच्चों से आधी फीस ली जा रही है।

सभी बच्चे होनहार, सात को दे रहे निशुल्क सुविधा :

प्राचार्य श्रीवास्तव के मुताबिक सभी बच्चे पढ़ाई-लिखाई में होनहार हैं और परीक्षा में अच्छे अंक ला रहे हैं। इन 193 में से सात ऐसे होनहार बच्चे है जिनकी प्रतिभा देख उनकी शिक्षा, आवास व अन्य सुविधाओं का खर्च स्कूल स्वयं उठा रहा है।

कक्षा 11वीं के छात्र तेजेंदरसिंह ने कहा कि वह पढ़-लिखकर आर्मी या पुलिस में अफसर बनना चाहता है। कक्षा नौवीं के छात्र नरेंद्रसिंह एवं लाखनसिंह ने कहा कि वो भी पढ़ लिखकर शिक्षक या सेना का अधिकारी बनकर देशसेवा करना चाहते हैं।<>

 

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