छत्तीसगढ़

सुतर्रा सचिव ममता कश्यप की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों एवं पंचों ने उठायी आवाज

सचिव की मनमाना रवैये से तंग आकर ग्रामीण व जनप्रतिनिधि शिकायत करने पहुँचे जनपद CEO और SDM पोंडीउपरोडा कार्यालय।

कोरबा: सुतर्रा जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतो में सचिवों के एक ही जगह 10-10 साल से जमे रहने व मनमौजी ढंग से काम करने से अक्सर जनपद स्तर पर तथा जिला स्तर पर शिकायतें होती रही है।

शासन ने हर ग्राम पंचायतों में विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित किए हैं जिसमें ग्राम विकास के लिए लाखों रूपये आबंटित करती है परंतु ज़मीनी स्तर पर विकास कार्य न कराकर कई सचिव कागज में फर्जी काम दिखाकर अपना जेब भरने के लिए मशगूल हो जाते हैं।

जिससे ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों में सचिवों के बीच विवाद गहराता जाता है। सचिवों की मनमाना रवैये से तंग आकर ग्रामीण व जनप्रतिनिधि स्वयं ही इसकी शिकायत करते रहे हैं।

ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का बंदरबांट करने वाली एक महिला सचिव कु. ममता कश्यप के खिलाफ पंचों एवं ग्रामीणों ने मोर्चा खोला है। लंबे समय से सचिव के षडयंत्र का शिकार हो रहे पंचों व ग्रामीणों ने परेशान होकर सचिव का तबादला किए जाने की गुहार सबसे पहले जनपद पंचायत पोंडीउपरोडा सीईओ और पोंडीउपरोडा एस.डी.एम. के पास खड़े होकर तबादला करने की मांग की है।

शिकायत करने पहुंचे किसान

यह मामला पोंडीउपरोडा विकासखंड के ग्राम पंचायत सुतर्रा की है। शिकायत करने पहुंचे किसान कांग्रेस जिला पूर्व अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश डिक्सेना ने बताया कि सचिव कु.ममता कश्यप विगत 9 से 10 सालों से यहां पदस्थ है। वह मनमाना ढंग से पंचायत का काम करती है। उसके द्वारा पंचों को न ही बैठक की जानकारी दी जाती है और न ही प्रस्ताव के लिए बैठक आयोजित किया जाता है।

बगैर किसी चर्चा-परिचर्चा के प्रस्ताव बनाकर बिचौलियों को सौंप देती है। उसके इस मनमाना रवैये पर पंचों एवं ग्रामीणों द्वारा सवाल जवाब करने पर वह लड़ाई में उतारू हो जाती है।

पूर्व में भी जनपद स्तर पर शिकायत करने के बाद भी सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से उसका मनोबल दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। पंचों को दरकिनार कर सचिव के द्वारा नियमों की अवहेलना करते हुए शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।

गुपचुप तरीके से प्रस्ताव तैयार कर काम कराने के एवज में रूपया आहरण कर बिना काम कराए रुपया गबन कर देती है। ग्राम पंचायत में निर्माण कार्य कराने व समान खरीदने के लिए किसी पंच व ग्रामीणों की सहमति नहीं लेती। बिना बैठक के मनचाहा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत की समस्याओं को दूर करने पर जोर देने के बजाए अपनी सुविधाएं बढ़ाने की तरफ ध्यान दिया जाता रहा है। ग्रामीणों व पंचों ने सचिव कु.ममता कश्यप का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से करने की मांग की है जिससे की ग्रामपंचायत की अव्यवस्था दूर हो सके।

झूठे केस में फ़साने की देती है धमकी

सुतर्रा के जनपद सदस्य श्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि सचिव ममता कश्यप लगभग एक दशक से उक्त ग्राम पंचायत में कार्यरत है। इस बीच कहीं दूसरी जगह उसका स्थानांतरण नहीं किया गया। ग्राम पंचायत से संबंधित आय-व्यय की जानकारी मांगने पर हमेशा टाल-मटोल की है सूचना के अधिकार से भी जानकारी मांगने पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराती।

उल्टा जानकारी मांगने वाले को पुलिस थाना में झूठे केस में फ़साने की देती है धमकी। आज तक उसके मनमाने रवैये से नाराज होकर कोई भी जब भी ऐतराज जताते हुए सचिव ममता कश्यप से सवाल-जवाब किया गया तो उसने पुलिसिया हथकंडे अपनाकर जेल भेजने की भी धमकी देती है।

महिला कर्मचारी होने के वजह से दबंगई पर उतारू हो जाती है। पूर्व में जनपद पंचायत में उसके खिलाफ की गई शिकायत भी ठंढे बस्ते में डाल दिया गया है। सचिव के द्वारा पंचों और ग्रामीणों को जनपद में भी ऊंची पहुंच होने का दंभ दिखाया जाता है।

ग्रामीणों को नहीं हो पाती ग्राम सभा की जानकारी

ग्राम के ही पंच श्री रामरतन जायसवाल एवं कृष्णा मार्को जी का कहना है कि ग्राम सुतर्रा में ग्रामीणों को कभी भी ग्राम सभा से संबंधित जानकारी नहीं देती न ही मुनादी कराती है जिससे गांव वालों को कई महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती। ग्राम सभा मे कोरम पूरा नहीं होने पर कुछ काम से ग्राम पंचायत में आए लोगों से रजिस्टर में दस्तख़त ले लेती है।

जनपद स्तर पर सुतर्रा ग्राम की मॉनिटरिंग कराई जाए और गांव वालों के सामने ग्राम पंचायत के आय-व्यय की जानकारी साझा की जाए तो सभी मामलों से पर्दा उठ जाएगा तथा सचिव के आय और व्यय के बीच के खेल का पर्दाफाश हो जाएगा।

स्वच्छता अभियान के तहत जहां सरकार हर पंचायत को ओडीएफ करने के निर्देश दे रही है। वहीं पोंडी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत सुतर्रा में सचिव, पर बिना शौचालय निर्माण कराये उसका पैसा गबन किये जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है की ग्राम सुतर्रा के कई हितग्राहियों का शौचालय निर्माण के नाम पर सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर पैसा तो निकाल लिया लेकिन उसे हितग्राही को नही दिया गया.

सुतर्रा की सचिव ममता कश्यप के मौखिक निर्देश

बता दें की ग्राम पंचायत सुतर्रा की सचिव ममता कश्यप के मौखिक निर्देश पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत सुतर्रा के हितग्राहियों द्वारा स्वयं की राशि से शौचालय बना लिया गया है, जिसकी स्वीकृत राशि 12000 है, जो कि सचिव द्वारा कई हितग्राहियों को उक्त शौचालय की राशि भुगतान नहीं की गई है.

जबकि जियो टैक करा लिया गए हैं एवं कई हितग्राहियों के शौचालय राशि के अभाव में अभी तक नहीं बन पाए है. उनके शौचालय आज तक अपूर्ण स्थिति में हैं तथा कई शौचालय सचिव के माध्यम से बनवाया गया है, किंतु वह भी अपूर्ण और गुणवत्ता हीन है.

इससे साफ जाहिर होता है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में सचिव ममता कश्यप एवं पूर्व सरपंच के द्वारा शौचालय की राशि में भारी भ्रष्टाचार किया गया है.

ग्रामीणों ने कुँआ मरम्मत व आंगनबाड़ी मरमत में हुए अनिमितताओं तथा 14वें वित्त एवं मूलभूत योजना के तहत कराए गए काम के एवज में निकाले गए रुपयों के बंदरबांट करने की शिकायत जनपद CEO और SDM पोंडीउपरोडा से किए हैं।

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