ग्रामीणों को मिली राहत, पंचायत के आदेश को हाई कोर्ट ने किया खारिज

हाई कोर्ट के आदेश से ग्राम पंचायत पुरी के वन अधिकार पट्टा प्राप्त ग्रामीणों को राहत मिली है। ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों के पट्टा को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया था।

ब्यूरो चीफ विपुल मिश्रा
बिलासपुर। हाई कोर्ट के आदेश से ग्राम पंचायत पुरी के वन अधिकार पट्टा प्राप्त ग्रामीणों को राहत मिली है। ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों के पट्टा को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया था। हाई कोर्ट ने पंचायत के आदेश को खारिज कर दिया है। कांकेर जिले की जनपद पंचायत चारामा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पुरी के 12 भूमिहीन ग्रामीणों को वर्ष 2012 और 2015 में वन अधिकार पट्टा देने का प्रस्ताव ग्राम पंचायत ने पारित किया था।

पंचायत के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कलेक्टर कांकेर, आयुक्त आदिवासी विकास विभाग व वन संरक्षक ने स्वीकृति देते हुए पट्टा प्रदान कर दिया। वर्ष 2016 में किसी ने तहसीलदार के कोर्ट में पट्टा वितरण में नियमों की अनदेखी की शिकायत की। जांच के बाद तहसीलदार ने 14 जुलाई 2016 को रिपोर्ट पेश कर शिकायत को फर्जी करार दिया। तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद एसडीएम ने प्रकरण को नस्तीबद्घ करने का आदेश जारी किया था।

राज्य में सरकार बदलने के बाद 17 मार्च 2021 को फिर से ग्राम पंचायत में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर ग्राम पंचायत के सरपंच में पंचायत की बैठक बुलाई और सर्वसम्मति ने वन अधिकारी पट्टा को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। प्रभावित ग्रामीणों ने वकील सोमकांत वर्मा और मनोहर देवांगन के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने वन अधिकार संरक्षण अधिनियम 2012 के चार क ए के प्राविधानों का हवाला देते हुए ग्राम पंचायत के फैसले को विधि विरुद्घ बताया है। यह भी कहा कि ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर नहीं दिया है। मामले की सुनवाई करने के बाद जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच ने ग्राम पंचायत के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है।

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