विपश्यना ध्यान बुद्ध की विश्व को अद्भुत देन : ओजस दास

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर..

रायपुर: सिद्धार्थ गौतम बुद्ध मनुष्य जाति के इतिहास में पहले ऐसे ज्ञानी है जिनका जन्म पूर्णिमा को हुआ, निर्वाण भी पूर्णिमा के दिन ही हुआ और उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी पूर्णिमा की रात हुई. ऐसी अद्वितीयता पूरे विश्व में और कहीं भी देखने को नहीं मिलता. पूरी दुनिया में भारत ही अकेला देश है जहां यह संयोग संभव हो सका.

राजकुमार से त्यागी हुए भगवान गौतम बुद्ध कठिन तपश्चर्या के बाद सत्य की उपलब्धि होने पर पूरी दुनिया में अमन-चैन एवं मनुष्य के जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए मौलिक रूप से विपश्यना ध्यान का जो प्रयोग दिया है वह पूरे विश्व के लिए अमूल्य धरोहर है. गौतम बुद्ध धर्म के पहले मनोवैज्ञानिक है उनके द्वारा मौलिक रूप से प्रतिपादित विपश्यना ध्यान का नियमित प्रयोग हमारे वर्तमान जीवन में वह सारी उपलब्धि उपलब्ध कराने में समर्थ है जिसकी आकांक्षा हम सबके जीवन में होती है और जिसकी तलाश आध्यात्मिक रूप से मनुष्य आजीवन करते रहता है.

अपनी ही मुर्छा के कारण मृत्यु भी आ जाती है और तलाश पूरी नहीं होती. मृत्यु नजदीक आ जाने पर हमारे जीवन में पछतावा के सिवाय और कुछ नहीं होता. हम सोचते ही रह जाते है कि जिसे हमें अपने जीवन में पाना चाहिए था उसे हमने पाया नहीं और जो पाने योग्य नहीं था उसमें ही हमने जीवन का सार देखा और अब मृत्यु भी आ गयी और कुछ हासिल नहीं आया.

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