विश्वकर्मा भगवान एक हस्तलिपि कलाकारः संजय श्रीवास्तव

रायपुर : रायपुर में भगवान विश्वकर्मा की जयंती श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई। इस मौके पर पहुंचे आरडीए अध्यक्ष एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने भवन निर्माण के क्षेत्र में सिविल इंजीनियरी के पद में रहते हुए उल्लेखनीय कार्य करने वाले वरिष्ठ सी.एस पिल्लीवार साहब का सम्मान किया साथ ही इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि का निर्माण किया उनकी जयंती से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होने आगे कहा कि नवनिर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती का यह पर्व हमें देश-प्रदेश के विकास में शिल्पकारों. उद्यमियों तथा निरन्तर अपनी श्रम साधना में रत कर्मकारों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर देता है। उन्होंने इस पावन दिवस के महत्व को स्थापित करने के लिए प्रदेश के सभी दस्तकारों. शिल्पकारों. उद्यमियों सहित सभी का आह्वान किया कि वे राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लें।

श्रीवास्तव ने कहा कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थी. प्राय: सभी विश्वकर्मा की ही बनाई कही जाती हैं। यहां तक कि सतयुग का स्वर्ग लोक. त्रेता युग की लंका द्वापर की द्वारिका और कलयुग का हस्तिनापुर आदि विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं। सुदामापुरी की तत्क्षण रचना के बारे में भी यह कहा जाता है कि उसके निर्माता विश्वकर्मा ही थे। इससे यह आशय लगाया जाता है कि धन-धान्य और सुख-समृद्धि की अभिलाषा रखने वाले सभी को भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना मंगलदायी है।

उन्होने आगे कहा कि हिन्दू धर्म में विश्वकर्मा को सृजन का देवता माना जाता हैA ऐसा कहा जाता है कि वह दुनिया के सबसे पहले इंजीनियर और वास्तुकार थे । इस जयंती वाले दिन खास तौर पर औद्योगिक क्षेत्रों. फैक्ट्रियों. लोहे की दुकान. वाहन शोरूम में इसकी पूजा होती है. इसके अलावा मशीनों. औजारों की सफाई व पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि इनकी आराधना करने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य घर में आती है। विश्वकर्मा भगवान एक हस्तलिपि कलाकार थे। जिन्होंने हमें सभी कलाओं का ज्ञान दिया था।
इस कार्यक्रम के अवसर पर टी.एम. घाटे जी. सी.एस पिल्लीवार. तिजन बाई. शिवनारायणर ताम्रकार. सुरेश मिर्घानी. अमिताभ मिश्रा. प्रभु साहू. फागुनलाल साहू. बबलू डे. जोगीराम साहू. जीतू साहू. आनंद मूर्ति तुकाराम साहू. एवं रामकुमार महिलवार उपस्थित थे ।

Back to top button