छत्तीसगढ़

वोट की राजनीति में दबि शिक्षा नीति 

संविलयन बनी सरकार के गले की हड्डी
आरक्षण रोस्टर के नियमों के उल्लंघन और पदोन्नित का राज्यव्यापी विरोध
बस्तर में कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश, कार्टून लगावें बच्चा इंग्लिश की बुक पढ़ रहा है शिक्षक सो रहा है

–अमुराग शुक्ला

जगदलपुर. राज्य सरकार भले ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लाख दावे करे लेकिन जो बात निकल कर सामने आ रही है वह यह बताती हैं कि वोट बैंक की राजनीति के चलते शिक्षानीति का सही क्रियान्यवयन नहीं हो पा रहा है। शिक्षाकर्मियों की भर्ती, इसके बाद शिक्षा गारंटी और अन्य के साथ ही शिक्षा के स्तर को सुधारने के जो प्रयास किए गए वो पूरे प्रदेश में नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसका असर बस्तर सहित अन्य इलाकों में भी देखा जा रहा है।

शिक्षाकर्मियों के संविलयन और पदोन्नित का जो खेल खेला गया इसके बाद यहां पर अजाक्स संघ ने पदोन्नित को लेकर सवाल उठाया है। मालूम हो कि बस्तर में अंग्रेजी के लिए मीडिल स्कूलों में रोस्टर के नियम के अनुसार कुल पांच पद स्वीकृत हैं। इसमें प्रधान अध्यापक सहित हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान और गणित के 0िशक्षकों का होना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में जब बस्तर में पदोन्नित की सूची जिला पंचायत से जारी की गई तो बस्तर में अंग्रेजी विषय के कुल 243 पद रिक्त पाए गए।

आनन फानन में इन पदों को भरने के लिए आरक्षण रोस्टर को दरकिनार करते भूगोल और इतिहास के शिक्षाकर्मियों को कला संकाय में पदोन्नत कर दिया गया। इस मसले को लेकर जब अजाक्स संघ ने खुला विरोध किया तो मामले को कमिश्नर दिलीप वासनीकर ने संज्ञान में लेकर इस मामले के लिए निष्पक्ष जांच कमेटी बनाने कलेक्टरों को निर्देशित किया है। बस्तर में अब तक जांच समिति का गठन नहीं हो पाया है। नियम की मानें तो जो जिस संकाय से आकर अपनी भर्ती ले रहा है उसे उसी संकाय में पदोन्नित डिग्री के आधार पर मिलना चाहिए। ऐसा नहीं होने से अंग्रेजी के 243 पदों पर भर्ती का औचित्य साबित नहीं होता है। अंग्रेजी के पदों को कला के साथ समायोजित कर काम को इतिश्री किया जा रहा है।

कान्वेंट का मुकाबला बेमानी

मालूम हो कि प्रदेश में जब इस साल के हाईस्कूल, मिडिल स्कूल और हायर सेकण्डरी के नतीजे आए तो शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने कहा था कि हमाने बच्चे जिस गुणवत्ता के साथ नतीजे ला रहे हैं आज भी कान्वेंट स्कूल की पढ़ाई पर सवाल उठते हैं। हमें कान्वेंट का मुकाबला करना है और अपने स्तर और बढ़ाना है। वास्तविकता इससे हटकर सामने आ रही है।

जब शासकीय स्कूलों में अंग्रेजी का शिक्षक ही नहीं होगा और उनके स्थान पर भूगोल और इतिहास वाले बच्चों को पढ़ाने जाएंगे तो यह आसानी से समझा जा सकता है कि कौन क्या पढ़ा रहा है और कौन कितना समझ रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि कान्वेंट पर किंडरगार्डन से ही अंग्रेजी पढ़ाया जाता है शासकीय स्तर पर कक्षा छटवीं से अंग्रेजी के लिए बाध्यता है। हालांकि शिक्षामंत्री ने इस बात को गंभीरता से लेते कहा था कि हमारे प्रदेश में चलने वाले स्कूली सिलेबस में समय के साथ परिवर्तन किया जाएगा जिससे की शासकीय स्कूलों का स्तर और उठ सकेगा।

सरकार मानती है

मालूम हो कि एक संकाय के सीटों को भरने के लिए दूसरे संकाय का सहारा लिए जाने को लेकर राज्य भर में विरोध हो रहा है। इस बात को लेकर सरकार का मानना है कि ऐसा किया0 जाना गलत है। उक्ताशय की जानकारी से धमतरी जिला पंच0ायत को अवगत करवाया जा चुका है। बावजूद इसके लिए गए निर्णय पर विचार और संशोधन का  शिक्षाकर्मियों को इंतजार है।

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