राष्ट्रीय

वोटर लिस्ट मामला: SC में फैसला सुरक्षित, सोमवार को हुई जोरदार बहस

दो नेताओं द्वारा चुनाव कराने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

नई दिल्लीः

मध्य प्रदेश और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची में नामों का दोहराव होने के आरोप मे कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं की याचिकाओं को लेकर पार्टी और चुनाव आयोग के वकीलों के बीच उच्चतम न्यायालय में सोमवार को जोरदार बहस हुई।

न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल
और विकास सिंह ने चुनाव कराने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

सिब्बल कांग्रेस नेता कमलनाथ और सचिन पायलट की ओर से, जबकि सिंह चुनाव आयोग की पैरवी कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने दोनों राज्यों में वोटर वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) मशीनों के सत्यापन की मांग भी की है।

सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था का नाम खराब करने की और मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाकर दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर अपने अनुकूल आदेश हासिल करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सिब्बल ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव ‘‘लोकतंत्र का सार’’ हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के चार विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में कथित गड़बडिय़ों एवं नामों के दोहराव के उदाहरण दिए।

सिब्बल ने उदाहरण देते हुए कहा कि 36 मतदाताओं के अलग-अलग ब्यौरे हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें एक ही हैं और अकेले मध्य प्रदेश में 60 लाख फर्जी मतदाताओं का पता चलने को लेकर यह महत्व रखता है। साथ ही, चुनाव आयोग ने सूची से 24 लाख नाम हटा दिए।

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