सालो से लंबित है मजदूरी, वनविभाग की घोर लापरवाही हो रही उजागर

रितेश गुप्ता:

कटघोरा: पसान वनपरिक्षेत्र के पसान नर्सरी में विभाग की ओर से कराए गए पौधरोपण कार्य में पसीना बहाए, मजदूरों को 2 साल होने के बाद भी नहीं मिला है मजदूरी, सिर्फ उन्हें मिल रहा है तो आश्वासन, अब तो आलम यह है की वन विभाग के चक्कर लगाते दर्जनों मजदूर थक चुके हैं पैसे के लिए सरकारी कार्यालय के सामने मिन्नतें करते बैठे रहते है।

मामला कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र का है जहां 2018 में वन विभाग की ओर से नर्सरी प्लांटेशन में पौधरोपण का काम करवाया गया था जिसमे सैकड़ो मजदूर काम किए थे, नर्सरी में खड्डे खोदना, पौधा लगाना, फैंसिंग करना जैसे तमाम काम किए थे, जिनमे से अब तक दर्जन भर से भी ज्यादा मजदूरों को उनके हक का पैसा नहीं मिल सका है

वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा हर बार उन्हें बस आश्वासन देकर उलटे पाँव लौटा दिया जाता है। मजदूरों द्वारा पूछने पर पसान सर्किल के रेंजर निश्छल शुक्ला व डिप्टी रेंजर प्रबल प्रताप सिंह गोल मोल जवाब देते हुए मजदूरी देने के वजाय इससे उससे मिलने की सलाह दे डालते है।

मजदूरों ने लगाया आरोप

पसान नर्सरी में काम किये मजदूरों ने पसान वन परिक्षेत्र के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उनके द्वारा राशि का आहरण कर गबन कर लिया गया हैं।

परेशान ग्रामीण पहले की भाँती आज भी कार्यालय के सामने मजदूरी लेने बैठे नजर आ रहे हैं, मजदूरी के लिए आखिर उन्हें क्यूँ बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है ? क्यों उन्हें मेहताना नहीं मिल रहा है ? ऐसे में जहन में सवाल उठना लाजमी हो जाता है की मजदूरों की खून पसीने की कमाई में सरकारी कर्मचारी डाका डाल रहे हैं।

मजदूरों ने बताया उनकी समस्या को लेकर जल्द ही जिला कलेक्टर व वनमंत्री मो.अकबर से राजधानी में मुलाक़ात करेंगे ओर लापरवाह अधिकारी कर्मचारी की लिखित शिकायत कर जल्द मजदूरी भुगतान करवाने की कोशिश करेंगे.

बहरहाल पौधरोपड़ का कार्य किए सैकड़ो मजदूरों में से कई भोले भाले मजदूरों की मजदूरी नहीं मिली है,ये हालात कहने को मजबूर करता है की सम्बंधित अधिकारी कर्मचारी मजदूरों का पैसा शायद हजम करना चाह रहे हैं ।वन विभाग के चक्कर लगाकर थक चुके मजदूरों का कहना है यदि जल्द से जल्द उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया तो वे विभाग के खिलाफ लामबंद होके सड़कों पर उतरने मजबूर हो जायेंगे!

क्या कहते है पसान रेंजर

पसान वनपरिक्षेत्र के रेंजर ने इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया।

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