चुनावी नतीजों का बेसब्री से इंतजार, सूबे के किसानों ने रोकी धान की ब्रिकी

सूबे में जहां एक ओर सत्ता विरोधी लहर दिख रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की हवा भी दिखाई दे रही

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजों का लोग कितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, सूबे के किसानों ने फिलहाल अपने धान बचाकर रख लिए हैं और वे इसे चुनाव के नतीजों के बाद बेचना चाहते हैं।

मार्केट के सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की ओर से धान का न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) 2,500 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने के वादे के बाद किसान अपने धान नहीं बेच रहे है।

ऐसा शायद इसलिए भी है क्योंकि सूबे में जहां एक ओर सत्ता विरोधी लहर दिख रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की हवा भी दिखाई दे रही है। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दो लाख रुपये तक के लोन को माफ करने के वादे के बाद किसानों ने लोन चुकाना बंद कर दिया है।

बघेल का भरोसा, कांग्रेस जरूर पूरा करेगी वादा

किसानों को उम्मीद है कि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद एमएसपी बढ़ाने का फैसला करेगी। शनिवार को छत्तीसगढ़ कांग्रेस चीफ भूपेश बघेल ने किसानों से अपील की थी कि वे अपनी धान की फसल बेचकर रबी की फसल की तैयारी करें।

उन्होंने किसानों को यह विश्वास भी दिलाया था कि कांग्रेस अपने कर्जमाफी और एमएसपी वृद्धि के वादे को पूरा करेगी।

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