चाहते हैं घर में बड़े-बुजुर्गों की सेहत रहे हमेशा स्वस्थ तो इस दिशा में बनाएं उनका बेडरूम

दक्षिण-पश्चिम (नैऋ त्य) भाग ऊंचा और भारी होना चाहिए

नई दिल्ली। एक कहावत है जिस घर में बड़े बुजुर्ग हैं,उस घर में किसी बात की चिंता नहीं होती है। अपने स्वास्थ्य के साथ उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। क्यों कि वो सेहतमंद होंगे तो आप टेशन फ्री होंगे।

अगर किसी वजह से आपके घर के बुजुर्गों का स्वास्थ्य हमेशा खराब रहता है तो इसके पीछे आपके घर का वास्तुदोष भी हो सकता हैं।

इसलिए यदि इस दिशा में वास्तुदोष है, उनका शयनकक्ष उचित दिशा में नहीं है या कमरे के अंदरूनी हिस्सों में किसी प्रकार का वास्तुदोष है, तो यह परिवार के बाकी सदस्यों के साथ ही परिवार के बुजुर्गों के स्वास्थ्य और आयु को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) भाग ऊंचा और भारी होना चाहिए

ध्यान रहे घर का दक्षिण-पश्चिम (नैऋ त्य) भाग ऊंचा और भारी रहे। यहां कोई वजनी वस्तु रखी जा सकती है। यह कोना बुजुर्गों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार में उनके महत्व को बनाए रखता है।

घर का पूर्वी भाग हमेशा खुला और हवादार रखना चाहिए। यह भाग साफ-स्वच्छ हो और धूप आती रहे। इस दिशा में खिड़कियां होना भाग्यशाली माना जाता है।

उन्हें खुली रखने से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। इस दिशा में स्टोर रूम, शौचालय, सीढ़ियां, लंबे पेड़ बिलकुल नहीं लगाना चाहिए। इससे परिवार के बच्चे और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है।

बुजुर्गों का कमरा दक्षिण दिशा में होना चाहिए

परिवार के मुखिया और परिवार के बुजुर्गों का कमरा दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना चाहिए। हालांकि अगर बुजुर्ग काम से रिटायर हो गए हैं और अब आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों में समय बिताते हैं, तो उन्हें पूर्व-उत्तर (ईशान), पूर्व या उत्तर में भी कमरा दिया जा सकता है।

यदि बुजुर्ग (विशेष रूप से महिला) का शयनकक्ष दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) कोण में स्थित है, तो इससे परिवार में अशांति पैदा सकती है। इसी तरह यदि उनका कमरा उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में है, तो उनके बीमार पड़ने की पूरी आशंका रहती है।

बिस्तर पर सोते समय सिर पूर्वी दिशा में होना चाहिए। यदि यह संभव नहीं हो तो दक्षिण दिशा में भी बदला जा सकता है।

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