पाताल में जाता जलस्तर!

- मनीष शर्मा

मुंगेली: जिले में भूमिगत जल स्तर काफी तेजी से नीचे जा रहा है जो प्रतिवर्ष चिंता का विषय ही माना जायेगा। मुंगेली में भूमिगत जल स्तर को रीचार्ज करने के लिये किसी भी तरह के कदम न उठाया जाना उससे अधिक चिंता का विषय बना हुआ है। अगर यही आलम रहा तो आने वाले सालों में मुंगेली जिले में पानी का संकट विकराल रूप धारण कर सकता है।

बता दें इस ज्वलंत समस्या के लिये स्थानीय निकायों सहित जिला प्रशासन के द्वारा इसकी सुध ली जानी चाहिये। मुंगेली में भूमिगत जल की सतह के नीचे जाने की खबरों के बाद भी प्रशासनिक चिंता की लकीरें न दिखना वाकई आश्चर्य का ही विषय माना जायेगा। इतना ही नहीं कोई भी जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा है।देश-प्रदेश में वर्षा के जल को संग्रहित कर उसके सदुपयोग के प्रयास जारी हैं।

प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर जल बचाने की अपीलें की जाती हैं, पर मुंगेली में यह निष्प्रभावी ही प्रतीत होती हैं। हालांकि मुंगेली में स्टार ऑफ टुमारो गैर राजनैतिक संगठन काफी समय से वृक्षारोपण करता दिख रहा है मगर एक संगठन के अकेले प्रयास से निश्चित सफलता नही माना जा सकता है। इसके लिए वृहत स्तर पर शासन, जिला प्रशासन को ठोस निर्णय के साथ आगे आना होगा।

लगभग डेढ़ दो दशक पहले तक नलकूप खनन के दौरान दो सौ,तीन सौ फीट की गहरायी पर पानी मिल जाया करता था, आज के समय में पानी, पाँच सौ फीट के नीचे ही मिल पा रहा है जोकि भविष्य के लिये गहरे संकट से गुजरने का अनुमान है।

मुंगेली नगर पालिका के द्वारा भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिये अब तक कोई भी कारगर कदम नही उठाये गए । जिसके लिए अविलंब नये भवनों के निर्माण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाना चाहिए। हमें यह कहने में कोई संकोच नही कि नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारियों के द्वारा अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ खरीदी की ओर ही केंद्रित किया जाकर, इस ओर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।

निजी तो निजी बल्कि सरकारी इमारतों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को नहीं लगाया गया है तो बाकी की सुध कौन लेगा,रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सबसे पहले सरकारी भवनों (चाहे वे सरकारी हों या किराये के) में अनिवार्य कर दिया जाना चाहिये।अगर ऐसा हुआ तो यह एक नज़ीर बनेगा और इससे होने वाले फायदों से जब आम जन रूबरू होंगे तब वे इसकी ओर प्रेरित हो सकते हैं।

अभी समय है और समय रहते अगर सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम लगा दिया जाता है तो आने वाले बरसात के मौसम में इसका फायदा देखने को मिल सकता है। नही तो फिर वो कहावत चरितार्थ होते दिखेगा कि जब कुंए में ही भाँग घुली हो तो किसी से क्या उम्मीद की जाये! बहरहाल तेजी से प्रतिवर्ष गहराते जलसंकट व गिरते जल स्तर से निपटने शासन, जिला प्रशासन, समस्त गैर राजनैतिक संगठनों को सामने आना चाहिए।

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