जलस्रोत सूखे, पानी की तलाश में गांवो की ओर रुख कर रहे वन्यजीव

आसपास के जंगली जानवर पानी के लिए बस्ती का रूख करने लगे हैं.

जागेश्वर सिन्हा

बालोद न्यूज़ : भीषण गर्मी ने आमजन के साथ जंगली जानवरों को भी परेशानी में डाल दिया है। मई माह की शुरूआत से ही सूर्य अपना प्रचण्ड तपीश से हाहाकर मचा दिया है। वन्य जीव पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगे हैं। जंगलों में बने तालाब व अन्य जलस्रोत सूख गए हैं। ऐसे में वन्यजीव पानी के लिए आबादी वाले क्षेत्रों में आने लगे हैं। ग्राम बड़हुम हितेकसा मालगांव जंगली भेजा सहित जिले के वनांचल ग्राम में व आसपास के जंगली जानवर पानी के लिए बस्ती का रूख करने लगे हैं।

ग्रामीण ने बताया कि इस वर्ष जलस्रोत फरवरी में ही दम तोड़ चुके थे और फिर तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण ही क्षेत्र के कई जलस्रोत सूख चुके हैं। ऐसे में जंगली जानवर प्यास बुझाने सुरक्षित जलस्रोतों की तलाश में जंगलों में भटकते नजर आने लगे है। जानकारों की माने तो इन वन्यप्राणियो को 24 घंटों में मुश्किल से एक बार ही पानी रात को ही नसीब होता होगा।

जंगल मे बड़ी संख्या में हैं वन्यजीव

क्षेत्र के वनों में बड़ी संख्या में वन्यप्राणी होने के सबूत मिलते हैं। जंगलों में भ्रमण के दौरान वन्य जीव सडक़ पार करते भी देखने मिल जाते हैं। इसके अलावा जंगली जलस्रोतों सियार, नीलगाय, जंगली बंदर, खरगोश, लोमड़ी सहित विभिन्न प्राणियों के पद चिन्ह देखे जा सकते हैं।

योजना सिर्फ कागजों तक सीमित

गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को जंगल में पानी उपलब्ध कराने हर वर्ष योजना बनाकर अलग से बजट निर्धारित किया जाता है। बजट के तहत काम कराने के बाद वन विभाग सभी प्रक्रिया कागजों में पूरी कर देता है। इस कारण प्रत्येक वर्ष गर्मी के चार महीने में कई जंगली जानवर पानी को खोजते हुए अपनी जान गंवा बैठते है। इनमें कुछ ऐसे भी है जो शिकारियों की चपेट में आ जाते हे। यह सब लंबे समय से हो रहा है, इस बार फिर गर्मी का मौसम शुरू हुए 2 महिने होने को है, लेकिन जंगल में विभाग ने वन्य प्राणी के लिए पानी पीने की व्यवस्था नहीं की है। इस कारण वन्य जीव जंगल से भटकते हुए गांवों व शहर की तरफ रूख करने में लगे है।

शिकारी बना रहे निशाना, विभाग मौन

जंगली जानवर भोजन पानी की तलाश में जंगल से निकलकर ग्रामीण बस्तियों तक आ रहे जो शिकारियों के निशाने पर रहते है। शिकारी गांवो के आसपास घूमते वन्यजवो को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं जो विभाग को कानों कान पता तक नही चलता

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