जिंदगी की भागदौड़ में हम अपने कुछ अल्पविराम को महसूस करना भूल जाते हैं – सच्चिदानंद जोशी

बड़ी बातों को ध्यान रखने के लिए चलते हम जिंदगी की छोटी बातों को अनदेखा कर देते हैं- सच्चिदानंद जोशी

सोशल मीडिया ने लिखने की एक नई विधा को जन्म दिया है- सच्चिदानंद जोशी

महिलाएं सदैव पुरूषों से श्रेष्ठ हैं, इसलिए बराबर कभी नहीं हो सकती- सच्चिदानंद जोशी

प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, सच्चिदानंद जोशी “कलम” रायपुर के 33 वीं कड़ी में शामिल हुए. प्रभा खेतान फाउंडेशन के कार्यक्रम कलम की 33 वीं कड़ी होटल हयात रायपुर में संपन्न हुई जिसके प्रस्तुतकर्ता थे श्री सीमेंट एवं कांशी मेमोरियल सोसायटी सहभागी थी।

प्रदेश के साहित्यिक कार्यक्रम “कलम” में इंदिरा गांधी नेश्नल सेंटर ऑफ आर्ट्स के सदस्य और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सच्चिदानंद जोशी ने शिरकत की। लेखक के साथ विचारों को साझा करने के लिए सूत्रधार के रूप में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति शैलेन्द्र सराफ ने शिरकत की.

सच्चिदानंद जोशी ने अपनी किताब कुछ अल्पविराम पर बात करते हुए “कुछ अल्पविराम” आज की दौड़ – भाग, व्यस्तता से भरी जिंदगी के अनछुए पहलू को बताती है। हम ज़िंदगी में बड़ी बातों पर इतना व्यस्त हैं कि छोटी-छोटी बातों को महसूस करना भूल जाते हैं। जिस प्रकार भाषाओं से अल्पविराम गायब हो गए हैं, उसी प्रकार हमारे जीवन से अल्पविराम गायब हो गए हैं। मैंने अपनी किताब में उन्हीं छोटे-छोटे अल्पविराम को लिखने की कोशिश की है. यह किताब कहानी, नाटक, कविता या उपन्यास जैसी किसी विधा में फिट नहीं होती है, लेकिन जिंदगी की छोटी बातों को समेटने की कोशिश की है.
जोशी ने कहा कि आज की भाषा समतल होती जा रही है. सोशल मीडिया ने लिखने की एक नई विधा को जन्म दिया है. एक पाठक के सवाल पर जोशी ने कहा कि महिला और पुरूष बराबर हो ही नहीं सकते क्योंकि महिलाएं हमेशा पुरूषों से श्रेष्ठ हैं. ईश्वर ने महिलाओं को सृजन करने की क्षमता दी है जो पुरूषों के पास नहीं है. महिलाएं वो हर काम कर सकती हैं जो पुरूष कर सकते हैं लेकिन पुरूष महिलाओं के सारे काम नहीं कर सकते .

सच्चिदानंद जोशी ने पत्रकारिता के इतिहास के विषय पर दो पुस्तकों का प्रकाशन किया है साथ ही रंगमंच, साहित्य, टेलीविजन आदि में भी सक्रिय रहे हैं।
जोशी जी की कविता संग्रह “मध्यांतर” और “सच्चिदानंद जोशी की लोकप्रिय कहानियां” की काफी सराहना हुई। सच्चिदानंद जोशी विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहें साथ ही देश के जनसंचार एवं पत्रकारिता विश्व विद्यालयों की स्थापना से जुड़े होने का श्रेय भी प्राप्त है।

कार्यक्रम के संचालक गौरव गिरिजा शुक्ला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में नीरज दूबे, उप आयुक्त जीएसटी एंड सेंट्रल टैक्सेस ने लेखक सच्चिदानंद जोशी को मेमेंटो भेंट किया. वहीं सूत्रधार के रुप में उपस्थित शैलेन्द्र सराफ को जिंदल स्टील एंड पावर के प्रेसिडेंट प्रदीप टंडन ने स्मृति चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में खास मेहमान के रूप में संदीप वानसुत्रे, विश्वदीप शुक्ला, कृति कृदत्त एवम् अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कलम रायपुर के साहित्यिक कार्यक्रम में अब तक देश के जाने-माने लेखक एवं साहित्यकार शिरकत कर चुके हैं।

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