छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ : स्कूल खुलने को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री ने क्या कहा…..पढ़िए

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

रायपुर : स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम समग्र शिक्षा के माध्यम से बस्तर जिले के शिक्षकों के साथ प्रारंभिक भाषाई एवं गणितीय कौशलों के विकास के संबंध में आयोजित परिचर्चा में शामिल हुए। उन्होंने बस्तर संभाग के शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली। शिक्षकों ने स्कूलों को खोले जाने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निकायों विशेषकर शाला प्रबंधन समितियों को दिए जाने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पालकों के साथ चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके। स्कूल शिक्षा मंत्री ने वेबिनार के माध्यम से बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, सुकमा, बीजापुर के सुदूर अंचलों में कार्यरत शिक्षकों से सीधा संवाद कर उनके विचारों को जाना।

साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर आने और दूरी बनाकर बिठाकर ही उनकी कक्षाएं ली जाए :

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने केन्द्रों, मोहल्ला कक्षाओं में कोरोना से संबंधित सावधानियों की जानकारी भी ली। सभी शिक्षकों ने अवगत कराया कि साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर आने और दूरी बनाकर बिठाकर ही उनकी कक्षाएं ली जाती हैं। डॉ. टेकाम ने संकट के समय शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अध्यापन करवाएं जाने पर सभी की खूब प्रशंसा की एवं बस्तर क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा संचालित बुल्टू के बोल, लाउडस्पीकर स्कूल और मोहल्ला कक्षाओं को एक ऐसा सफल उपाय बताया जिसकी वजह से बच्चों की पढाई निरंतर जारी रह सकी।

बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक 

स्कूल शिक्षा मंत्री को बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक अमिय राठिया ने संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित सरल कार्यक्रम एवं उसके माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक कौशलों में हुए सुधारों की जानकारी दी। मंत्री डॉ. टेकाम द्वारा शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली गई। शिक्षकों ने बताया कि गांवों में कोरोना की स्थिति बहुत कम लेकिन शहरों में इसका प्रभाव अधिक है। स्कूल खुलने पर शहरों में निवासरत शिक्षक यदि गावों में पढ़ने आएंगे तो संक्रमण फैलने की संभावना होगी।

स्कूल खुलने पर आधे-आधे बच्चों को रोस्टर पद्धति से या फिर कक्षाओं को अलग अलग दिनों या समय पर खोले जाने का सुझाव भी कुछ शिक्षकों द्वारा दिया गया। शिक्षकों द्वारा पोर्टा केबिन, आश्रम शाला और केजीबीवी में बच्चों की बहुत अधिक संख्या होने से इन संस्थाओं को खोलने से सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन नहीं हो पाने और संक्रमण के खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।

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