चौघड़िया और राहुकाल क्या है ? इसमें क्या करें ? क्या न करें ?

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव:

चौघड़िया मुहूर्त

शीघ्रता में यात्रा आदि शुभकार्यों का मुहूर्त आदि न बनता हो और अकस्मात कोई कार्य करना पड़े तो उस अवसर पर चौघड़िया मुहूर्त उपयोगी है। आठ चौघड़िया दिन में तथा आठ चौघड़िया रात्रि में होते हैं। दिनमान तथा रात्रिमान को पृथक-पृथक 8 भागों में विभक्त करके चौघड़िया निकाला जाता है।

अमृत, चर, लाभ तथा शुभ चौघड़िया श्रेष्ठ तथा काल, रोग, उद्वेग चौघड़िया अशुभ है। यदि दिनमान 30 घटी (12 घंटे) का हो तो चौघड़िया प्रत्येक वार के अनुसार इस प्रकार बनेंगे। दिन, रात बड़े-छोटे होने से चौघड़िया भी बड़ा-छोटा होगा।

राहुकाल

चौघड़िया की भांति ही दिनमान को आठ भागों में विभक्त करके राहुकाल निकाला जाता है। दिनमान ज्ञात करने के लिए स्थानीय सूर्यास्त से सूर्योदय का समय घटाया जाता है। अगर दिनमान 12 घंटे का हो तो यह एक भाग 1 घंटा 30 मिनट का होता है। इस प्रकार प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय राहुकाल होता है।

इस दौरान कोई भी शुभ कार्य का प्रारंभ नहीं किया जाता है। यदि कार्य पहले से चल रहा हो तो उसको चलने दिया जाता है। रविवार से शनिवार तक राहुकाल के भाग का क्रम इस प्रकार होता है – 8, 2, 7, 5, 6, 4, 3।

दिल्ली के लिये वार के अनुसार राहुकाल का अनुमानित समय इस प्रकार होगा जबकि सूर्योदय का समय 6.30 बजे प्रातः और सूर्यास्त 6.30 सायंकाल का माना गया है। जिसमें हर काम होता है सिद्ध – कौन सा है ऐसा मुहूर्त

कार्य-सिद्धि के लिए होरा मुहूर्त

कार्य-सिद्धि के लिए होरा मुहूर्त पूर्ण फलदायक और अचूक माने गए हैं। सात ग्रहों के सात होरा हैं, जो दिन-रात के 24 घंटों में घूमकर मनुष्य को कार्य-सिद्धि के लिए अशुभ समय में भी सुसमय सुअवसर प्रदान करते हैं।

सूर्य की होरा राज-सेवा के लिए उत्तम है, प्रवास के लिए शुक्र की होरा, ज्ञानार्जन के लिए बुध की होरा, सभी प्रकार की कार्य सिद्धि के लिए चन्द्रमा की होरा, द्रव्य-संग्रह के लिए शनि की होरा, विवाह के लिए गुरु की होरा तथा युद्ध, कलह और विवाद के लिए मंगल की होरा उत्तम होती है।

प्रत्येक होरा 1 घंटे की होती है। जिस दिन जो वार होता है, उस वार के (सूर्योदय के समय) 1 घंटा तक उसी वार की होरा रहती है। उसके बाद 1 घंटे की दूसरी होरा उस वार के छठे वार की होरा होती है।

प्रवास के लिए शुक्र की होरा श्रेष्ठ

इसी प्रकार दूसरी होरा के वार से छठे वार की होरा तीसरे घंटे तक रहती है। इस क्रम से 24 घंटे में 24 होरा बीतने पर अगले वार के सूर्योदय-समय उसी (अगले) वार की होरा आ जाती है। किसी कार्य की सिद्धि के लिए ऊपर जो होरा लिखे गए हैं, किसी भी दिन उस होरा के 1 घंटे-मुहूर्त में वह कार्य करेंगे तो सफलता आपके हाथ लगेगी।

उदाहरण के लिए मान लीजिए, आज गुरुवार है और आज ही आपको कहीं प्रवास करना (जाना) है। प्रवास के लिए शुक्र की होरा श्रेष्ठ है, अतः मालूम करना है कि आज गुरुवार के दिन शुक्र की होरा किस-किस समय रहेगी। चक्र में गुरुवार के सामने खाने में देखा तो चौथे, ग्यारहवें एवं अठारहवें घंटे में शुक्र की होरा मिली। अतएव प्रवास के लिए उपर्युक्त होरा शुभ है।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

ज्योतिष आचार्या रेखाकल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है। कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं।

आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

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