क्या है कोरोना वायरस का L-type strain..? जिसने गुजरात में बढाई मृत्यु दर

गुजरात में मंगलवार तक कोरोना वायरस के कुल 3,548 मामले सामने आए हैं।

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में गुजरात भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात और मध्यप्रदेश के इंदौर में मौत के बढ़ते आंकड़ों के पीछे कोरोना का एल-स्ट्रेन वायरस हो सकता है। गुजरात के बायोटेक्नोलॉजी शोध केंद्र के निदेशक जीसी जोशी ने कहा कि हमने कोरोना वायरस की संरचना को डिकोड कर लिया है, जिसमें उसके तीन म्यूटेशन मिले हैं।

गुजरात में मंगलवार तक, कोरोना वायरस के कुल 3,548 मामले सामने आए हैं। वहीं, इस जानलेवा वायरस  ने गुजरात में 160 लोगों की जान ले ली है, जिसमें से 100 से ज़्यादा मौतें पिछले 8 दिनों में हुई हैं। जिस तेज़ी से इस राज्य में मृत्यु दर बढ़ रहा है, उससे सरकार के साथ स्वास्थ्य एक्सपर्ट्स भी चिंतित हैं।

मध्यप्रदेश के इंदौर में अभी तक 60 मौतें

इसके अलावा मध्यप्रदेश के इंदौर में अभी तक 60 मौतें हो चुकी हैं, जो पूरे राज्य की आधी है। गुजरात और इंदौर दोनों जगह मृत्यु दर 4.57 और 4.97 है, जबकि पूरे भारत की 3.1 प्रतिशत है। इन आंकड़ों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन जगहों पर कोरोना वायरस का दूसरे तरह का स्ट्रैन फैल रहा है, जिसकी वजह से यहां मृत्यु दर ज़्यादा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों का मानना है कि कई देशों में जहां मृत्यु दर ज़्यादा है, वहां कोरोना वायरस का एल-टाइप स्ट्रेन का दबदबा देखा गया है और यही वजह गुजरात की बढ़ती मृत्यु दर की भी हो सकती है। इस दावे को लेकर शोध शुरू हो चुका है।

मार्च के पहले हफ्ते में, चीन में हुए एक शोध में यह बात सामने आई थी कि दो तरह के कोरोना वायरस फैल रहे हैं, जो दुनियाभर में लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। शांघाई के पेकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के दो एल और एस टाइप स्ट्रेन की पहचान की थी।

जानिए क्या है L-टाइप और S -टाइप स्ट्रेन में क्या है अंतर

देश में कोरोना वायरस के तीन स्ट्रेन का पता चला है। जिसमें दो सबसे घातक स्ट्रेन- एल-स्ट्रेन और एस-स्ट्रेन हैं। वुहान से आया एल-स्ट्रेन वायरस काफी ज्यादा घातक है। जिससे संक्रमित होने वाले मरीज की बहुत जल्दी मौत हो जाती है।

इस शोध में एक ख़ास संचरण पैटर्न पर विशेष रूप से ध्यान दिया था, जिसमें जनवरी के पहले हफ्ते तक एल-टाइप कोरोना वायरस का दबदबा था, जब इस प्रकोप का केंद्र सिर्फ चीन के वुहान के आसपास था। जैसे ही ये संचरण दूसरी जगहों पर भी फैलना शुरू हुआ, तो कोरोना वायरस का एस-टाइप स्ट्रेन हावी हो गया। इस शोध में पाया गया कि एल-टाइप का संचरण दर ज़्यादा है, क्योंकि ये इंसानों में तेज़ी से बढ़ता है।

बाद में ये पाया गया कि इटली (26,644 मौतें), स्पेन (23,521 मौतें) और न्यूयॉर्क (17,280 मौतें) जैसे देशों या राज्यों में जहां मृत्यु दर काफी ज़्यादा था, वहां एल-टाइप स्ट्रेन बुरी तरह फैला हुआ था।

जानकारी के मुताबिक गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर COVID-19 बीमारी के लिए ज़िम्मेदार वायरस SARS-CoV-2 की म्यूटेशन पर शोध करेगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन दो स्ट्रेन्स में से एल-टाइप ज़्यादा आक्रमक है और जिसकी वजह से गुजरात में मृत्यु दर तेज़ी से बढ़ रही है।

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