वास्तु

क्या वास्तु है कर्जदारों के आत्महत्या का कारण, जानें

कर्जदार लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है

आजकल के वर्तमान समय में लोगों की इच्छाएं लगातार बढ़ती जा रही है। और इच्छाओं का बढ़ना हमारे लिए मुसीबतें भी लाते जा रहा है। अगर हमारी इच्छा है कि सबके घर में कार है तो हमार पास क्यों नही हैं।

देखा-देखी आप कार तो ले लेते हैं,लेकिन लेने के बाद इनकम कम और ऊपर से आप कर्ज के नीचे इतने दंब जाते है कि जिससे आप मानसिक तनाव के शिकार हो जाते हैं। आजकल आर्थिक कष्ट और बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या करने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है।

रोजाना अखबारों में इस प्रकार की दुःखद खबरे पढ़ने को मिलती है। आज ग्रामीण हो या शहरी, व्यापारी हो या नौकरी पेशा, देश की आबादी का एक बड़ा प्रतिशत कर्ज में डूबा हुआ है।

पहले की तुलना में आजकल कर्जदार लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। निश्चित ही इसमें भाग्य के साथ-साथ निवास स्थान या व्यवसाय स्थल का वास्तुदोष पूर्ण होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

व्यक्ति कुछ सामान्य वास्तु नियमों का पालन करे तो निश्चित ही वह अपनी आमदनी बढ़ा सकता है। पैसों के नुकसान को रोक सकता है और आर्थिक कष्ट और कर्ज़ से मुक्ति पा सकता है।

कभी भी बड़े भवनों के बीच छोटा भूखण्ड न खरीदें। आस-पास के भवनों की तुलना में जो भवन बहुत छोटा होता है, उसमें रहने वाले कभी उचित तरक्की नहीं कर पाते इस कारण वह गरीबी व कर्ज़ में डूबे रहते हैं।

बाउण्ड्रीवाल और भवन का उत्तर पूर्व (ईशान कोण) दबा, कटा, गोल होना काफी अशुभ होता है। इस दोष के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसा कोई भी दोष हो तो उसे शीघ्र ही दूर करवाना चाहिए। इसके विपरीत ईशान कोण का बड़ा होना अत्यन्त शुभ होता है।

भवन एवं प्लॉट का ईशान कोण वाला भाग नैऋत्य कोण की तुलना में नीचा होना चाहिए। ईशान ऊंचा होने से गृहस्वामी को आर्थिक संकट आते रहते हैं।

भवन की उत्तर, पूर्व दिशा एवं ईशान कोण में भूमिगत पानी की टंकी, कुंआ या बोर होना बहुत शुभ होता है, इससे आर्थिक संपन्नता आती है। उपरोक्त दिशाओं के अलावा अन्य किसी भी दिशा में या कोण में होना अशुभ होकर आर्थिक कष्ट का कारण बनता है।

भवन के मध्य में तो किसी भी प्रकार का गड्ढा, कुंआ, बोरिंग इत्यादि होने से गृहस्वामी भयंकर आर्थिक संकट में आ जाता है। अतः दोषपूर्ण गड्ढों को जितना जल्दी हो सके भर देना चाहिए।

भवन के मुख्यद्वार के सामने किसी भी प्रकार का वेध जैसे खम्बा, पेड़, खुली नाली इत्यादि होना अशुभ होता है। इस प्रकार का दोष अन्य कष्टों के अलावा आर्थिक कष्ट का कारण बनता है।

फेंगशुई के अनुसार शयनकक्ष या तिज़ोरी वाले कमरे के प्रवेशद्वार के सामने वाली दीवार के बांए कोने में सम्पत्ति और भाग्य का क्षेत्र होता है। यह कोना कभी भी कटा हुआ नहीं होना चाहिए। यहां पर धातु की कोई चीज़ रखना या लटकाना शुभ होता है।

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