संसद में एक विवाद सुलझा तो दूसरा खड़ा हो गया

संविधान में बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया और विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया.

संसद में एक विवाद सुलझा तो दूसरा खड़ा हो गया

नई दिल्ली: संसद में बुधवार को एक विवाद सुलझा तो दूसरा खड़ा हो गया. बुधवार को गुजरात चुनावों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ पीएम मोदी के आरोपों को लेकर विवाद सुलझा, लेकिन धर्मनिरपेक्ष संविधान में बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया और विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, ‘अगर किसी शख्स को संविधान पर विश्वास नहीं है तो उसे संसद सदस्य होने का कोई अधिकार नहीं है.’ विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में पूरे दिन हंगामा किया और पूछा कि ऐसा आदमी संसद और सरकार में क्या कर रहा है. हेगड़े के इस्तीफे की मांग कांग्रेस समेत समाजवादी पार्टी, लेफ्ट और तृणमूल कांग्रेस ने भी की. ये मांग पुरजोर तरीके से उठी कि हेगड़े इस्तीफा दें या फिर उन्हें सरकार से बर्खास्त किया जाए.

दरअसल ये पूरा विवाद केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत हेगड़े के उस बयान को लेकर उठा जिसमें उन्होंने धर्मनिरपेक्ष संविधान में बदलाव का सवाल उठाया था. अनंत हेगड़े ने कर्नाटक के कोप्पल ज़िले में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि बीजेपी संविधान को बदलने के लिए सत्ता में आई है.

अनंत हेगड़े ने कथित तौर पर कहा था, ‘ये लोग कहते हैं कि संविधान ने उन्हें हक दिया है, लेकिन मैं उन लोगों से सहमत नहीं हूं, संविधान में उन्हें हक मिला है, लेकिन कालांतर में संविधान में कई बार बदलाव हुए हैं और आगे भी संविधान में बदलाव होंगे. उस संविधान में बदलाव करने के लिए ही हम आए हैं.

हंगामा बढ़ता देख सरकार ने सफाई देने में देरी नहीं की. संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि सरकार अपने आप को हेगड़े के बयान से अलग करती है. लेकिन सरकार ने भले ही अपने आप को बयान से अलग कर लिया, लेकिन हेगड़े ने ना माफी मांगी और ना ही कोई स्पष्टीकरण दिया. हेगड़े के करीबी सूत्रों के मुताबिक वो इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और बयान पर कायम हैं.

हालांकि इस नए विवाद से पहले पुराना विवाद सुलझान में सरकार कामयाब रही. संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने बीच का रास्ता निकालने में अहम भूमिका निभाई. अरुण जेटली और गुलाम नबी आजाद ने अपने-अपने दलों का पक्ष रखा. जेटली ने कहा, ‘पीएम मोदी ने अपने भाषण में पूर्व पीएम मनमोहन या पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की देशभक्ति और निष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया और न ही उनकी ऐसी कोई मंशा थी. ऐसी कोई भी धारणा गलत है.

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