ज्योतिष

किसी व्यक्ति को अचानक से कब मारा जाता है ? क्या कहते है सितारे इस बारे में

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

शरीर यदि बलवान हो तो कोई भी कार्य पूर्ण हो सकता है। व्यक्ति किसी भी संकट का सामना कर सकता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि पहला सुख निरोगी काया, शरीर स्वस्थ हो तो जीवन को वास्तव में सुखमय कहा जा सकता है।

स्वस्थ शरीर जीवन की बड़ी से बड़ी विपदा को झेल लेता है। शारीरिक स्वस्थता के आगे सारे दुख गौण लगने लगते है। एक स्वस्थ शरीर में दुख झेलने की क्षमता सामान्य से अधिक होती है। जीवन में आने वाले सुख-दुख के आने के समय की जानकारी ज्योतिष विद्या के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।

जन्मकुंडली में बन रहे शुभ अशुभ योग दशा और गोचर आने पर अपना फल देते है। शुभ ग्रहों की दशा में व्यक्ति का उत्थान होता है, सफलता मिलती है, धन-धान्य का आगमन होता है। इसके विपरीत अशुभ ग्रहों की दशा एवं गोचर में रोग, शोक और दोष बढ़ते है, दुर्घटनाएं होने की स्थिति बनती है।

ज्योतिष विद्या मार्गदर्शक का कार्य करती हैं, मार्गदर्शन के संकेतक कुंडली के योग होते है। यह सत्य है कि जन्मकुंडली में निर्मित योगों से होने वाली दुर्घटनाओं को टाला नहीं जा सकता है, किन्तु दुर्घट्ना बड़े रुप में ना हो इसके लिए उपाय कर उन्हें छोटे रुप में परिवर्तित किया जा सकता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब इन घटनाओं की जानकारी कुंडली विश्लेषण करा कर पूर्व ही जान ली गई हो।

भागदौड़ से भरे जीवन में दुर्घटनाएं होने के संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ गई है। कई बार दुर्घटना छोटी सी होती है और कम नुकसान होता है, कई बार दुर्घटना से मौत की स्थिति भी बन जाती है, और व्यक्ति मौत के मुंह में समा जाता है या फिर मौत के मुंह से वापस आ जाता है।

फिर भी दुर्घटनाएं किस भी प्रकार की हो, शारीरिक कष्ट, आर्थिक हानि और समय की बर्बादी के साथ साथ परिवार के लिए भी यह स्थिति तनावपूर्ण होती ही है। दुर्घटनाएं दो प्रकार की होती है- व्यक्तिगत दुर्घट्नाएं या सामूहिक दुर्घट्नाएं।

दुर्घटनाओं का साधन – वाहन दुर्घटना, जल दुर्घटना, विमान दुर्घट्ना और अग्नि दुर्घटना। किसी व्यक्ति की कुंड्ली से दुर्घट्नाओं का विचार करने के लिए निम्न नियमों पर विचार करना चाहिए- 1 भाव 2 ग्रह 3 राशि 4 नक्षत्र 5 योग

भाव

दुर्घट्नाओं का विचार करने के लिए कुंडली के त्रिक भावों का विचार किया जाता है। त्रिक भावों में 6, 8 और 12 वें भाव आते है। इन भावों में स्थित ग्रह, इन भावों के स्वामियों और इन भावों के स्वामियों के स्वामियों को दॄष्ट करने और युति करने वाले ग्रहों की दशा/अन्तर्द्शाओं में दुर्घटना की स्थिति बन सकती है।

जो ग्रह त्रिक भावों को दॄष्ट करते हैं, उन ग्रहों की दशाओं में भी दुर्घटना संभावित होती है, इसी प्रकार मारकेशों की दशाएं भी शारीरिक दुर्घटना देने का कार्य कर सकती है। पापग्रहयुत/दृष्ट, लग्न और लग्नेश के कमजोर होने के कारण भी यह स्थिति बनती है। लग्न राशि संधि में होने पर भी दुर्घटनाओं की स्थिति देखी गई है।

षष्ट भाव में स्थित राशि, ग्रह, षष्ट भाव के अधिपति, ग्रहयोग, ग्रहदॄष्टि बहुत महत्वपूर्ण है। लग्न तथा लग्नेश देहभाव दर्शाते है उन का परीक्षण करना जरुरीर है। अष्टम भाव में स्थित ग्रह, अष्टम भाव को दॄष्ट करने वाले योग, अष्टमेश की कुंडली में स्थित इनसे आयु सीमा का विचार किया जाता है।

अष्टम भाव से अष्टम होने के कारण तॄतीय स्थान का विचार भी आयु निर्णय करने के लिए किया जाता है। इसे सहायक मृत्युस्थान के नाम से भी जाना जाता है। तीसरा भाव यात्राओं का भाव होने के कारण इस भाव से यात्राओं के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है।

तृतीय स्थान में स्थित ग्रह, दॄष्टि देने वाले ग्रह, तीसरे भावेश की स्थिति आदि का विचार किया जाता है। पराक्रमेश यदि त्रिक भाव से संबंधित हो, दॄष्टि दे या इनके भावेशों के साथ स्थित हो तो व्यक्ति को यात्राएं करते समय सावधान रहना चाहिए। इस योग में सूर्य, शनि जैसे अशुभ ग्रह सम्मिलित हो तो व्यक्ति को दुर्घटनाओं में अस्थिभंग होने की संभावनाएं बनती है।

जन्म नक्षत्र से तीसरे, पांचवें और सातवें नक्षत्र अशुभ नक्षत्र होने के कारण कष्टकारी होते है। यदि अष्टमेश 3/5/7 नक्षत्र में हो तो दुर्घटना की स्थिति बनने की संभावनाएं रहती है।
कई बार जन्मपत्री में अनेक अशुभ योग स्थित होते है, जो दुर्घट्नाओं का कारण बनते है।

जन्मकुंड्ली मॆं अशुभ योग बन रहे हों और उनकी पुनवर्ती हो रही हो तो यह दुर्घट्नाओं के होने को निश्चित करते है। नवमांश कुंड्ली के बाद ऐसे योगों को त्रिशांश कुंडली से भी देखा जाता है। और अंत में ग्रह गोचर की स्थिति देखी जाती है।

आईये इन योगों का विश्लेषण हम कुछ कुंड्लियों पर करते हैं-

राजीव गांधी कुंड्ली विश्लेषण
20 अगस्त 1944, 09:53, मुम्बई

राजीव गांधी जी की कुंडली कन्या लग्न और सिंह राशि की है। लग्न में अष्टमेश मंगल द्वादशेश सूर्य के नक्षत्र में और मात्र 1 अंश के साथ स्थित है। इस प्रकार यहां लग्न भाव पर अष्ट्मेश और द्वादशेश दोनों का अशुभ प्रभाव आ रहा है।

लग्नेश बुध स्वयं भी द्वादशेश सूर्य के नक्षत्र, और शुक्र, गुरु, चंद्र एवं सूर्य के साथ द्वादश भाव में ग्रह युद्ध में स्थित है। लग्नेश पर रोग भाव के स्वामी शनि की तीसरी दॄष्टि है। इस कुंडली की खास बात यह है कि यहां लग्न, लग्नेश, अष्ट्मेश एवं मृत्यु की गति बताने वाला ग्रह केतु भी सूर्य अर्थात द्वादशेश के नक्षत्र में है।

द्वादशेश का प्रभाव यहां इन सभी पर होने के कारण यहां ये सभी भाव, भावेश पीडित हो गए है। राजीव जी की अकाल मृत्यु बम विस्फोट में हुई। 21 मई 1991 दुर्घटना के समय राहु में केतु की अंतर्द्शा प्रभावी थी।

लाल बहादुर शास्त्री कुंडली विश्लेषण
09 अक्तूबर 1904, 11:15, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

लाल बहादुर शास्त्री जी की कुंड्ली धनु लग्न और कन्या राशि की है। लग्नेश गुरु पंचम भाव में वक्री अवस्था में है, राहु एवं षष्टेश शुक्र से दृष्ट है। इस प्रकार यहां लग्नेश कमजोर अवस्था में है अष्ट्म भाव को अष्ट्मेश मंगल की दृष्टि प्राप्त होने से अष्टम भाव बली हो गया हैं परन्तु त्रिक भावों का बली होना, नकारात्मक फल देता है। अब आयु कारक की स्थिति देखते हैं, आयुकारक ग्रह शनि भी तीसरे भाव के स्वामी है, और अपने से द्वादश भाव में स्थित हो, वक्र दॄष्ट से आयु भाव को पीडित कर रहे है।

वक्री ग्रह एक भाव पीछे से भी प्रभावित करते हैं, इस प्रकार शनि की दॄष्टि अष्टमेश चंद्र पर भी आ रही है। यह कुंडली एक बालक की है जिसमें बालक स्कूल में खेलते हुए, दुर्घटनाग्रस्त हुआ और बालक की मृत्यु हो गई।

जन्म विवरण – 25 मई 2003, 06:58 हैदराबाद
मृत्यु समय – 21 जनवरी 2011, 08:30 हैदराबाद

इस बालक जातक की कुंडली वृषभ लग्न और कुम्भ राशि की है। लग्न में सूर्य और राहु की युति लग्न भाव को कमजोर कर रही है। लग्नेश और षष्ठेश शुक्र द्वादश भाव में मारकेश बुध के साथ स्थित है। द्वादश भाव में स्थित शुक्र को द्वितीय भावेश मंगल की चतुर्थ दृष्टि प्राप्त हो रही है।

द्वादशेश मंगल स्वनक्षत्र में और अपने भाव को दृष्ट कर रहा है। अशुभ भाव के स्वामी का अशुभ भावेश से दॄष्टि संबंध शारीरिक कष्ट देता है। यदि दोनों का संबंध शुक्र और मंगल दोनों से हो रहा हो तो चोट दुर्घटना होने और रक्त अधिक बह जाने के कारण आयु कष्ट भी बनता है।

यहां लग्नेश शुक्र पर मंगल का प्रभाव दुर्घटना का योग बनाता है। यह योग द्वादश भाव में होने और कई मारकेश का प्रभाव होने के कारण अधिक गंभीर हो गया है। कुंडली के अष्टम भाव से आयु और दुर्घटना दोनों का विचार किया जाता है। दुर्घटना के समय राहु में बुध की अंतर्द्शा चल रही थी, राहु लग्न भाव में स्थित है और सूर्य के नक्षत्र में है। अंतर्द्शानाथ बुध इनके लिए मारकेश है।

इंदिरा गांधी कुंडली विश्लेषण
जन्म समय – 19 नवम्बर 1917, 23:11, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
मृत्यु – 31 अक्तूबर 1984, दिल्ली

भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 31 अक्तूबर 1984 को प्रात: 09:23 मिनट के लगभग २३ बुलेट उनके शरीर को भेदते हुए आरपार निकल गए, इसके बाद अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। इंदिरा गांधी जी की मृत्यु भी एक दुर्घटना के कारण हुई थी। असमय मृत्यु होने के कारण इनकी कुंडली को भी इस विश्लेषण में शामिल किया जा रहा है। इनका कर्क लग्न, मकर राशि है।

लग्न भाव में अष्ट्मेश शनि है। यहां अष्ट्मेश शनि द्वादशेश बुध के नक्षत्र में है। लग्न, लग्नेश दोनों पर शनि का प्रभाव है, और शनि यहां अष्टमेश व मारकेश दोनों की भूमिका निभा रहे है। लग्नेश चंद्र को षष्ठेश गुरु वक्री अवस्था में नवम दॄष्टि से प्रभावित कर पीडित कर रहे है।

त्रिक भावेश यदि वक्री होकर लग्नेश को पीडित करें तो आयु कष्ट के प्रबल योग बनते है। अष्टम भाव को द्वादश भाव में स्थित केतु की भी दॄष्टि प्राप्त हो रही है। अपने ही अंगरक्षक की गोलियों को शिकार होने पर इंदिरा गांधी जी की असमय मृत्यु हो गई।

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