मध्यप्रदेश

एम्बुलेंस ना मिलने पर हुई बच्ची कि मौत, 30 किलोमीटर बाइक में ले गए थे इलाज कराने

रतलाम हॉस्पिटल पहुंचने पर वे सभी बच्ची को लेकर अंदर गए, जहां उसे कुछ ही मिनटों के अंदर मृत घोषित कर दिया गया

एक बार फिर अस्पताल प्रशासन कि लापरवाही के चलते मासूम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. ताजा मामला मध्य प्रदेश के रतलाम से जुड़ा हुआ है. सैलाना के नंदलेटा गांव की रहने वाली लिटल जीजा न्यूमोनिया की बीमारी से ग्रस्त चल रही थी. बच्ची के पिता घनश्यान और मां जीनाबाई उसे सोमवार को दोपहर 3 बजे हेल्थ केयर सेंटर ले गए. शुरुआती इलाज के बावजूद उसकी स्थिति बिगड़ती रही और डॉक्टरों ने उसे रतलाम में बाल चिकित्सालय रेफर कर दिया.

घनश्याम ने हॉस्पिटल से एक ऐम्बुलेंस मुहैया कराने की अपील की, जो कि हॉस्पिटल में उपलब्ध नहीं थी. कार कि व्यवस्था न हो पाने के कारण बच्ची को ड्रिप लगी अवस्था में ही 30 किलोमीटर तक बाइक पर ले जाने पर मजबूर होना पड़ा. सही समय पर इलाज ना हो पाने कि वजह से बच्ची कि मौत हो गई.

पिता ने बताया एम्बुलेंस ना मिलने पर मैंने अपने एक दोस्त को बाइक लेकर बुलाया. मेरा दोस्त बाइक चला रहा था, जबकि मैं खुद अपनी बेटी को सीने से चिपकाए बीच में बैठा रहा. पीछे बच्ची की मां ड्रिप की बॉटल लिए बैठी रहीं. तीनों लोग बच्ची को इसी तरह से लेकर गांव की सड़कों से होते हुए 30 किलोमीटर दूर तक गए.

रतलाम हॉस्पिटल पहुंचने पर वे सभी बच्ची को लेकर अंदर गए, जहां उसे कुछ ही मिनटों के अंदर मृत घोषित कर दिया गया. बच्ची की मौत की बात सुनते ही उसके मां-बाप बेसुध होकर रोने लगे.

रतलाम के कलेक्टर इन-चार्ज सोमेश मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने रेज़िडेंट मेडिकल ऑफिसर से कहा है कि वह जांच कर यह बताएं कि कहीं इलाज में कोई कमी तो नहीं थी. मैंने यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या समय पर इलाज मिलने से बच्ची को बचाया जा सकता था?’

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