छत्तीसगढ़

जब धुर विरोधी नेताओं नेे मांदर पर मिलाया ताल से ताल

रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में देश की गंगा-जमुनी तहजीब अक्सर देखने को मिलती है। ऐसा ही एक मौका रविवार को कुडुख समाज के कार्यक्रम में कलाकेंद्र में देखने को मिला। जहां राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले विधान सभा नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंह देव, जनता कांग्रेस छतीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी और भाजपा नेता अनुराग सिंह देव ने मांदर पर एक साथ संगत की। तीनों ही नेताओं ने मांदर कमर में बांधा और फिर मिलाने लगे ताल, यही नहीं तीनों ने मिलकर सरगुजिहा नृत्य भी किया। जब कि यही नेता मंच पर एक दूसरे पर तंज कसने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते।

सामाजिक मंचों पर नहीं करते सियासत: प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इसका पूरा श्रेय कुडुख समाज के कर्मठ कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने ये अवसर उपलब्ध कराया। वैसे भी हम लोग समाज के मंचों पर सियासत नहीं करते। तो वहीं भाजपा के प्रदेश महामंत्री अनुराग सिंहदेव ने कहा कि सामाजिक मंचों को सियासत का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। कुड़ुख भाषा बोलने वालों की अंबिकापुर में एक अच्छी तादाद है। इसको हम लोग लिपिबध्द भी करवा रहे हैं। हमारी गंगा-जमुनी तहजीब ही हमारी पहिचान है। तो वहीं अमित जोगी इस मामले में कुछ भी बोलने के साफ-साफ बचते नज़र आए। बात चाहे जो भी हो मगर वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी की पुस्तक अलाव के बाद गिनेचुने ही ऐसे अवसर आए हैं जब पूरा सियासी कुनबा एक मंच पर नजर आाय। आपसी एकता और गंगा-जमुनी तहजीब क्या होती है, पूरे देश के राजनेताओं को छत्तीसगढ़ से सीखने की जरूरत है।

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