भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जब सीरीज हुयी थी पहली बार 1-1 से बराबर

ऑस्ट्रेलिया की एकमात्र पारी में कपिल देव और करसन घावरी ने पांच-पांच विकेट झटके। दूसरा टेस्ट एडिलेड में ड्रॉ रहा भारत को 331 रन का लक्ष्य मिला था

भारतीय क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के पहले तीन दौरे करने में तीन दशक का समय लगा तो तीसरे से चौथे दौरे पर जाने में सिर्फ तीन साल लगे।

भारतीय टीम का चौथा ऑस्ट्रेलियाई दौरा 1980-81 में हुआ, जिसमें भारत के कप्तान सुनील गावस्कर और ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल थे। यह पहला मौका था जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ तीन टेस्ट खेल रही थी।

चार साल पहले हुए पिछले दौरे पर कैरी पैकर का प्रभाव रहा था, लेकिन अब ऑस्ट्रेलियाई टीम दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी से मजबूत हो चुकी थी। इसके बावजूद भारतीय टीम ने उसे कड़ी टक्कर दी। नतीजा यह रहा कि यह सीरीज 1-1 से बराबर रही और भारत पहली बार ऑस्ट्रेलिया में कोई सीरीज ड्रॉ कराने में सफल हुआ।

सीरीज का पहला टेस्ट सिडनी में खेला गया, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने पारी और चार रन से जीता। इस टेस्ट की दोनों पारियों में भारतीय टीम 201 रन के समान स्कोर पर आउट हुई, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया की ओर से कप्तान चैपल ने अकेले ही 204 रन जड़ डाले।

इसके चलते ऑस्ट्रेलिया ने 406 रन का स्कोर बनाया। इस मैच की पहली पारी में संदीप पाटिल 65 रन के निजी स्कोर पर चोटिल होकर रिटायर्ड हर्ट हो गए थे, लेकिन पारी की हार बचाने के लिए उन्हें गावस्कर ने दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने भेजा, लेकिन भारत पारी की हार बचा नहीं सका।

ऑस्ट्रेलिया की एकमात्र पारी में कपिल देव और करसन घावरी ने पांच-पांच विकेट झटके। दूसरा टेस्ट एडिलेड में ड्रॉ रहा भारत को 331 रन का लक्ष्य मिला था और जब अंतिम दिन का खेल खत्म हुआ तो भारत का स्कोर आठ विकेट पर 135 रन था। तीसरा टेस्ट मेलबर्न में खेला गया। इस टेस्ट को भारत ने कपिल देव (5/28) के बेहतरीन स्पैल की मदद से जीता।

ऑस्ट्रेलिया के सामने सिर्फ 143 रन का मामूली लक्ष्य था, लेकिन कपिल की गेंदबाजी के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम सिर्फ 83 रनों पर ढेर हो गई और सीरीज ड्रॉ समाप्त हुई। यह टेस्ट गावस्कर के अपने सलामी जोड़ीदार चेतन चौहान को लेकर पवेलियन लौटने के लिए भी चर्चा में रहा था।

सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्रेग चैपल (368) ने सर्वाधिक रन बनाए, जबकि किम ह्यूज (330) भी पीछे नहीं रहे। भारत की ओर से संदीप पाटिल (311) सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। गेंदबाजी में ऑस्ट्रेलिया के डेनिस लिली (21) और डेन पास्को (16) ने 15 से ज्यादा विकेट लिए, जबकि भारत के लिए कपिल देव (14) ने सबसे ज्यादा विकेट लिए।<>

 

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