जिले में आखिर कब थमेगा पशु तस्करी का गोरखधंधा

-हिमांशु सिंह ठाकुर

कवर्धा।

कवर्धा जिले के ग्रामीण अंचलों से दूसरे राज्यों में संचालित मवेशियों के कत्लखानें में मवेशियों की खेप लगातार पहुंच रही हैं। जिसकी पुष्टि मुखबिर अथवा गा्रमीणों की सूचना पर बकायदा पुलिस के हाथं लगने वाले पशु तस्करों और जप्त मवेशियों कों देखकर की जा सकती हैं।

अभी तो दो ही रोज पूर्व बोड़ला पुलिस ने भी कत्लखाने ले जा रहे 13 मवेशियों को जप्त किया था। और इस मामले में दो आरोपि भी गिरफ्तार किए गये थे. लेकिन माना जा रहा है कि जिले में पशु तस्करी रोकने की दिशा में यह पुलिस की महज खानापूर्ति की ही कार्यवाही होती है। यह भी बताया जा रहा है कि पशु तस्करी के मामलों में जमकर लेनदेन भी हो रहा हैं.कार्यवाही सिर्फ उन मामलों में हो पा रही है जो सार्वजनिक हो रहे है।

इसके आलावा पुलिस,मुखबिर व ग्रामीणों की सूचना पर पकड़े गए पशु तस्करों पर तो नाक मुंह सिकोड़ कर जैसे तैसे कार्यवाही कर रही है लेकिन जिले के ग्रामीण अंचलों में निवासरत उन लोगों का पता नहीं लगा पा रही है अथवा पता लगाने की कोशिश ही नहीं कर पा रही है जो तस्करों को मवेशी मुहैया करा रहे हैं।अगर पुलिस अपनी पुरी जिम्मेदारी से एैसे लोगों के गिरेबां तक पहुंचकर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कोई ठोस कार्यवाही करे तो उम्मीद की जा सकती है कि जिले में पशु तस्करी रूक जाए।

– ऐसे करते हैं खेल

अगर सूत्रों की मानें तो जिले मे बेजा फल-फूल रहा है पशु तस्करी का यह कारोबार पुरी तरह सुनियोजित ढग से चल रहा हैं । कुछ पड़ोसी राज्यों के पशु तस्कर यहां पहुंचकर लगातार मध्यप्रदेश के सीमावर्ती ब्लॉक जैसे कि बोड़ला, पंड़रिया के ग्रामीण व वनांचलों का दौरा कर रहे है और मवेशी पालकों से संपर्क कर बीमार व अनुपयोगी पशुओं की जानकारी जुटा रहें है। जानकारी एकत्र करने के बाद बकायदा इनका सौदा किया जा रहा हैं। और सौदा तय होने के बाद अलग-अलग तरीकों से पशुओं की तस्करी की जा रही हैं।

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