कब खत्म होगी कैश की समस्या, किसान महीनों से लगा रहे बैंकों के चक्कर

राज शार्दुल:

कोंडागांव: क्षेत्र के किसान कैश की किल्लत से जूझ रहे हैं। यह सिलसिला महीनों से चल रहा है। धान बेचने के बाद से अब तक रकम के लिए किसान तरस रहे हैं। कैश के लिए किसानों के अलावा आम लोग भी परेशान हैं।सर्वाधिक परेशानी जिला सहकारी बैंक एवं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के खातेदारों को हो रही है।

मनमाफिक रकम अब तक नहीं मिल पाई

किसानों ने बताया कि वे अब तक बैंकों के 15 से 20 चक्कर लगा चुके हैं किंतु उन्हें मनमाफिक रकम अब तक नहीं मिल पाई है। कभी दो हजार तो कभी 5 हजार तथा कभी कभी ही 10 हजार तक की रकम मिल पाती है। इस रकम से उनका घर खर्च तो चल जाता है किंतु कई महत्वपूर्ण कार्य अटके पड़े हैं।

ट्यूबवेल खनन के लिए रकम की आवश्यकता

बैंकों में अपनी रकम के लिए पहुंचे किसानों से पता चला कि उनकी समस्या कम नहीं है कोई किसान शादी की तैयारी के लिए पैसा चाह रहा है तो किसी को ट्यूबवेल खनन के लिए रकम की आवश्यकता है तो किसी को वाहन आदि का कर्ज चुकाना है। इन्हीं सब कार्यों के लिए किसान बैंकों की चौखट पर महीनों से नाक रगड़ रहे हैं किंतु उन्हें रकम नहीं मिल पाया है।

किसान बैंकों में रकम के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें 5 से 10 हजार तक की रकम ही मिल पाती है यह क्रम पिछले 6 माह से चल रहा है। जिला सहकारी बैंक विश्रामपुरी में पहुंचे आदिवासी किसान मालोराम नेताम ने बताया कि वह अंत्याव्यवसायी संस्था से पिक अप वाहन महिंद्रा लोन पर लिया है। उसे किस्त के लिए तकादा किया जा रहा है तथा वह इस बीच कई किस्त नहीं पटा पाया है।

1 लाख धान का रकम जिला सहकारी बैंक के शाखा विश्रामपुरी में जमा

उसने बताया कि उसका लगभग ₹1 लाख धान का रकम जिला सहकारी बैंक के शाखा विश्रामपुरी में जमा है। रकम नहीं मिलने से वाहन के कर्ज का ब्याज पर ब्याज बढ़ता ही जा रहा है वही उसे बैंक में ₹5000 के लिए दिनभर बैठना पड़ा है।

ग्राम सलना निवासी कुशनाथ ने बताया कि उसका ₹65 हजार जिला सहकारी बैंक के खाते में जमा है उसे अपने मकान का मरम्मत करवाना है वह बैंक का कई चक्कर लगा चुका है किंतु उसे 5 हजार से अधिक नहीं मिलता। मानसून अब सामने पहुंच चुका है जिससे उसकी चिंता बढ़ रही है।

राहीबाई सोनारी ने बताया कि उसका लगभग ₹2 लाख खाते में जमा है। उसे अपने खेत में ट्यूबवेल खनन कराना है जिसके लिए वह कम से कम ₹1 लाख आहरण करना चाहती है किंतु उसे ₹5 हजार ही दिया जा रहा है। ग्राम खल्लारी निवासी मधु राम नेताम ने बताया कि उसे अपनी बेटी की शादी के लिए रकम की आवश्यकता है उसे ₹5 हजार दिया जा रहा है उस रकम से वह शादी कैसे कर पाएगा।

लगभग 6 माह से बनी है कैश की समस्या

क्षेत्र के किसान लगभग 6 माह से नगद राशि के लिए तरस रहे हैं यह अलग बात है कि कभी दो हजार तो कभी 5 हजार तो कभी कभार ही 1हजार तक की रकम मिल पाती है किसी भी किसान को अब तक मनमाफिक रकम नहीं मिल पाया है। किसानों का कहना है कि ऐसी समस्या तो नोटबंदी के समय भी नहीं हुई थी नोटबंदी के समय डेढ़ से दो माह ही परेशानी झेलना पड़ा था। जबकि इस समय तो 6 माह से अधिक हो गया वह पैसे के लिए तरस रहे हैं।

बांसकोट मे लगा दिया जाता है लिंक फेल की तख्ती

बैंकों में पैसा नहीं होने से हितग्राहियों को मनचाही रकम नहीं मिल पाती है। हितग्राही बैंक का चक्कर लगाते रहते हैं तथा बैंक में बैठे अधिकारियों को बार बार पूछते हैं कि रकम कब मिलेगी जिसके चलते बैंक के अधिकारी कैश काउंटर पर लिंक फेल की तख्ती लगा देते हैं।

हितग्राहियों के द्वारा रकम मिलने संबंधी बात पूछे जाने पर उस तख्ती की ओर इशारा कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ छतीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के शाखा बासकोट में देखा गया जहां सभी बैंकों में लेनदेन चल रहा था तो वहीं इस बैंक में लिंक फेल की तख्ती लगाकर समस्या से भागने की कोशिश की जा रही थी।

यहां हितग्राहियों ने बताया कि यहां का बैंक प्रबंधन कार्य के प्रति उदासीन रवैया अपनाता रहा है। बैंक के अधिकारी स्टेट बैंक से रकम लाने मे रुचि नहीं लेते जिससे यहां हमेशा ही कैश की समस्या बनी रहती है। बैंक प्रबंधन स्टेट बैंक से रकम की आपूर्ति करने के बजाय लिंंक फेल होने की तख्ती लगा देता है।

क्यों बनी है समस्या

बैंक से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि चूंकि बस्तर संवेदनशील क्षेत्र है इसलिए यहां रकम पहुंचने में दिक्कत होता है। हेलीकॉप्टर से ही यहां रकम पहुंचाई जाती है किंतु इस समय चुनाव के चलते काफी अंतराल हो चुका है हेलीकॉप्टर से रकम नहीं पहुंचा जिससे समस्या बढ़ गई।जिला सहकारी बैंक विश्रामपुरी की शाखा प्रबंधक हीरालक्ष्मी शाह ने बताया कि काफी मशक्कत के बाद जो रकम मिल पाता है उसे किसानों को बराबर वितरण की कोशिश की जाती है। हेलीकॉप्टर से रकम पहुंचने के बाद एवं आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही स्थिति में सुधार की संभावना है।

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