आपकी मनोकामना कब पूरी होगी ? ग्रह बताएँगे

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव:

मानव इच्छाओं की मिट्टी से बना पुतला है। इच्छाएं हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है। एक इच्छा पूरी होने के बाद दूसरी इच्छा स्वत: जन्म ले लेती है। मनुष्य सारी उम्र अपनी इच्छाएं पूरी करता रहता है, इच्छाएं है कि खत्म नहीं होती। हां यह जरुर है कि व्यक्ति के अनुसार इच्छाएं अलग अलग हो सकती है।

एक दिन व्यक्ति पूरा हो जाता है परन्तु इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती। मन में इच्छा रुपी हजारों बुलबुलें रोज जन्म लेते हैं और विलुप्त भी हो जाते है। हम सभी अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रयास करते हैं, पूरा प्रयास करने पर भी जब इच्छाएं पूरी नहीं होती है तो व्यक्ति या तो इसके लिए अपने प्रयास बढ़ा देता है या फिर निराशा में डूब जाता है।

इच्छाओं को पानी पर बुलबुले के संग्या दी गई है। एक बुलबुल समाप्त होता है तो दूसरा सामने आ जाता है। इसी तरह हमारे मन के सागर में हजारों इच्छों की लहरें टकराती है और स्वयं ही ट्करा कर बिखर जाती है। जीवन का सार यह निकलता है कि जो इच्छाएं पूरी हो जाएं उन्हें हम भूल जाते हैं, और जो पूरी नहीं होती उन्हें साथ लिए हम इस दुनिया से रुकसत हो जाते हैं।

इच्छाएं सकूं देती है अगर पूरी हो जाए तो, गर पूरी ना हो पाएं तो मन को पीड़ा दे जाती है। इच्छाओं की जन्मभूमि मन है, मन में उठने वाली हलचल इच्छाओं को विस्तार देती है, सहज नहीं है इन इच्छाओं को नियंत्रित करना। किसी ने सच कहा है कि गर किसी का अपने मन पर नियंत्रण नहीं है तो वह अपनी इच्छाओं का गुलाम हो जाता है।

हम जो चाहे, जो सोचे, जो कामना करें, जो कल्पना करें वो हमें हासिल हो जाएं, हम सभी कुछ इसी प्रकार की इच्छा रखते है। जीवन में जो कुछ भी पाने की कोशिश करें, इच्छा करें वो सब हमें प्राप्त हो जाएं। यह सोचने का विषय है कि मन में इच्छा होते हुए भी और प्रयास होते हुए भी हमें सब कुछ क्यों नहीं मिल पाता है।

इच्छाओं के फलों का मूल

जैसा की सर्वविदित है कि हम सभी उस पराशक्ति परब्रह्म शक्ति का अंश है। वो सर्वशक्तिमान सत्ता हम सभी में आत्म रुप में हम सभी में विद्यमान है। इसे हम यूं भी कह सकते हैं कि वो परब्रह्म अव्यक्त होते हुए भी व्यक्त है और व्यक्त होते हुए भी अव्यक्त है।

इसी तरह हम सभी ब्रह्मा है, फिर भी इच्छाओं की दौड़ में एक दूसरे से आगे निकलने के लिए दिन रात दौड़ रहे है। इच्छाएं पूरी हो तो मनोबल बढ़ाती है, और ऐसा ना होने पर आत्मविश्वास में कमी होती है। यह समझना, स्वीकार करना सहज नहीं है कि इच्छाओं का पूरा न होना, ईश्वर की मर्जी मान ली जाए।

कुछ इसी तरह की मंतव्यों को कचोटते हुए मन को हम समझाते है परन्तु स्वयं समझ नहीं पाते है। कई लोग नौकरी की जगह अपना बिजनेस करना चाहते है, परन्तु वो न चाहते हुए भी नौकरी कर रहे है। कुछ इसी तरह की स्थिति कुछ व्यापारियों की है कि वो नौकरी करना चाहते है पर व्यापार से जुड़े है।

जीवन की सभी समस्याएं और समाधान ज्योतिष विद्या से संबंधित है। जन्मपत्री का ग्यारवां भाव इच्छाओं का भाव है। इस भाव को इस भाव का स्वामी प्रभावित करें या गुरु शुभ होकर इसे भाव को देखें तो निश्चित रुप से व्यक्ति की इच्छाएं पूरे होती है। एकादश भाव से अष्ट्म भाव षष्ठ भाव छुपी हुई कामनाओं का है।

इस भाव के स्वामी का एकादश भाव में होने पर व्यक्ति की छूपी हुई इच्छाएं भी पूरी होती है। कार्यक्षेत्र, मकान और धन तीन वस्तुएं है, इन वस्तुओं को पाने के लिए व्यक्ति इच्छाएं करता है। एकादश भाव का स्वामी जिस भाव में स्थित हो, उस भाव के कारकतत्व व्यक्ति की इच्छाएं पूरी करने में सहयोग करता है।

एकादश भाव से बारह भावों की व्याखा –

जीवन को नियोजित ढ़ंग से जीना, और सोचा हुआ कार्य पूरा होने लगे तो यह कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति की एकादश भाव की दशाएं प्रभावी हों।

1. प्रथम भाव का स्वामी ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की सोची हुई योजनाएं लागू भी होती है और कार्यों में सफलता भी मिलती है।

2. द्वितीय भाव का स्वामी अगर एकादश भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को अचानक किसी क्षेत्र से कामना की पूरी होती है।

3. पराक्रम भाव का स्वामी यदि एकादश भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को अपने रिश्तेदारों और मेलजोल के माध्यम से धन की प्राप्ति या इच्छाओं की पूर्ति होती है। इस योग में इच्छा पूर्ति में अपना पराक्रम कम काम आता है इसकी अपेक्षा दूसरों का पराक्रम अधिक काम आता है।

4. चतुर्थ भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को आमजन, समाज और अपनी सोसायटी के लोगों का सहयोग मिलता है जिसके फलस्वरुप व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होती है।
5. पंचम भाव का स्वामी एकादश भाव में हो तो व्यक्ति को अपने स्नेही व्यक्ति का सहयोग मिलता है, और उसके सोचे हुए कार्य पूरे होते है।

6. छ्ठे भाव का स्वामी जब एकादश भाव में स्थित हो व्यक्ति की इच्छा पूर्ति में विरोधियों की योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

7. सप्तम भाव का स्वामी जब एकादश भाव में स्थित होने पर व्यक्ति अपने भाग्य का उदय स्वयं करता है, जीवन के अंतिम छोर तक भाग्य का सहयोग मिलता है और व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होने में भाग्य भी अपना कार्य करता है।

8. अष्टम भाव का स्वामी एकादश भाव में होने पर व्यक्ति की अनचाही मुरादें भी पूरी होती है। या यूं कहिए कि बिना मांगे भी बहुत कुछ हासिल हो जाता है, बगैर मेहनत के बहुत कुछ मिल जाता है।

9. नवम भाव का स्वामी एकादश भाव में स्थित हो तो व्यक्ति मिट्टी को भी सोना बनाने की योग्यता रखता है। पिता और बुजुर्गों का सहयोग व्यक्ति की कामना पूर्ति में सहयोगी बनता है।

10. कर्म भाव का स्वामी यदि एकादश भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए स्वयं ही प्रयास करने होते है। इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि अपनी अपनी कामनाओं की उड़ान के लिए अपना आकाश स्वयं ही तैयार करना होता है।

11. एकादश भाव का स्वामी अपने ही भाव में हो तो (गुरु ग्रह को छोड़कर) व्यक्ति दूसरों के हस्तक्षेप के बिना अपना कार्य स्वतंत्र रुप से पूरा करता है।

12. द्वादश भाव का स्वामी एकादस भाव में हो तो व्यक्ति को अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सामान्य से अधिक व्यय करने पड़ते है।

एकादश भाव से क्या-क्या देंखें ?

• किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा पूरी होगी या नहीं यह बात इस बात पर निर्भर करती है कि उस भाव की स्थिति जितनी बली है, वह भाव कितना सुस्थित है? आपातकाल में उसके कितना सहयोग मिलता है?

• एकादश भाव को इच्छाओं के अतिरिक्त हमारी महत्वाकांक्षाओं का भाव भी कहा गया है। इस भाव से ही व्यक्ति का लालच भी देखा जाता है। अपने लालच को पूरा करने के लिए हम क्या क्या कर सकते हैं, यह सभी इसी भाव से जाना जाता है।

• हमारे घर की बाहरी खूबसुरती का विचार करने के लिए भी इसी भाव का विश्लेषण किया जाता है। कई बार हमने देखा है कि कुछ घर बाहर से देखने में आलिशान लगती है, परन्तु घर के अंदर की स्थिति एकदम इसके विपरीत होती है। ऐसा भी देखा गया है कि घर बाहर से सामान्य दिखता है परन्तु अंदर ऐशो आराम की प्रत्येक वस्तु उपलब्ध होती है।

• प्रथम भाव का एकादश भाव होने के कारण यह भाव हमारी शारीरिक शक्ति, और शारीरिक समार्थ्य की व्याख्या करता है।

• अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए हम कितनी कोशिश करेंगे या अपने दायित्वों का निर्वाह किस प्रकार करेंगे यह एकादश भाव से जाना जा सकता है। अपने फर्ज को पूरा करने में कुछ लोग सुस्ती और लापरवाही दिखाते है, यह भी एकादश भाव से देखा जाता है।

सरल शब्दों में यह कहा जा सकता है कि एकादश भाव के शुभ होने पर व्यक्ति जीवन में आए अवसरों का का लाभ उठाता है, हाथ आए अवसरों को हाथ से जाने नहीं देता है, वह लापरवाह नहीं होता है।

• वास्तव में एकादश भाव व्यक्ति की चेतना शक्ति बताता है, दूसरों के मदद के लिए, भलाई के लिए हम क्या करते हैं और क्या नहीं। यह एकादश भाव से देखा जा सकता है।

• जीवन में किस्मत को कौन सी ऊंचाईयां हासिल होगी और कौन सी नहीं, हमारी किस्मत हमें कितना ऊंचा उठाएगे, और कितनी ऊंचाई से गिरा भी देगी यह भी एकादश भाव ही बताता है।

• एकादश भाव हमारी मेहनत का फल है। हमारी आय क्षेत्र, धन आगमन, आमदनी, तनख्वाह, सैलरी, लाभ और जिस भी प्रकार धन व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करता है, उन सभी साधनों को एकादश भाव से ही देखा जाता है।

• एकादश भाव में शुभ ग्रहों की स्थिति शुभ / सात्विक मार्ग से धन आगमन बताती है और अशुभ और पापी ग्रहों का होना अशुभ साधनों के योग बनता है। यह अनुभव में देखा गया है कि इस भाव पर जितने अधिक अशुभ, पापी, क्रूर ग्रह हों, वह व्यक्ति उतनी अधिक तेजी के साथ सफलता, उन्नति हासिल करता है।

• दशम भाव से द्वितीय भाव होने के कारण यह भाव हमारे पिता की आर्थिक स्थिति के विषय में भी बताता है। इस भाव में अशुभ ग्रहों की स्थिति पिता की आर्थिक स्थिति को कमजोर बताती है और शुभ एवं बली ग्रहों की स्थिति मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर ईशारा करती है।

• यह भाव हमारे धन आगमन के साधनों, बदलावों और धन कौन से मार्ग से आएगा, यह बताता है।

• धर्म में हमारी कितनी आस्था रहेगी यह भाव यह भी दर्शाता है। हमारी धार्मिकता कितना वास्तविक और कितनी आडंबरयुक्त होगी, इस भाव से जाना जा सकता है। नवम भाव से तीसरा भाव होने के कारण धर्म के लिए पराक्रम, पहल इसी भाव से जानी जाती है।

• छायादार पेड़ों का भी यह भाव है, बुजुर्गों के आशीर्वाद का भाव है।

• इस भाव से क्रय किए गए घर का विचार किया जाता है। ऐसी सभी संपत्तियां जिन्हें हमने निर्मित नहीं किया, और जो न हमें हमारे बुजुर्गों से मिली है, बल्कि हमने उन्हें धन देकर क्रय किया है। ऐसी सभी अचल संपत्तियां इसी भाव से देखी जाती है।

• किसी व्यक्ति के साथ हमारी पहली मुलाकात कैसी रहेगी और मुलाकात के बाद रिश्ता कितना परवान चढ़ेगा, यह सब इसी भाव से जाना जाता है। इस भाव का स्वामी अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो व्यक्ति की पहली मुलाकात बहुत अच्छी परन्तु आगे जाकर अंजाम बहुत अच्छा नहीं रहता है। उदाहरण के लिए नौकरी/स्कूल/कालेज/मित्र/प्रेमी आदि से पहली मुलाकात, प्रथम दिन यह सभ यह भाव बताता है।

• दूसरों से हमें क्या हासिल होगा और कितना हासिल होगा, इसके लिए भी इसी भाव का विचार किया जाता है।

• अधीनस्थ काम करने वाले, और सहयोगी आपको कितना सहयोग करते हैं, यह सब इसी भाव से देखा जा सकता है।

• यह भाव हमसे बड़ी आयु के मित्रों का भाव भी है। मित्र हमारे सुख-दुख में कितना साथ निभायेंगे, इसके लिए इस भाव का विश्लेषण ही किया जाता है।

• पुत्रवधु के स्वभाव, व्यवहार और आचार-विचार के लिए एकादश भाव को ही देखा जाता है।

• विद्या अर्जित करते समय सहयोगी सहपाठियों का भाव भी एकादश भाव ही है।

• विरोधियों के विरोधियों का भी यही भाव है। शत्रु का शत्रु मित्र होता है। इस भाव को इसीलिए मित्र भाव के रुप में भी देखा जाता है।

• यह भाव वॄद्धि के भाव के नाम से भी जाना जाता है। इस भाव में किसी भी भावेश का होना, फलों में वॄद्धि का संकेत करता है। उदाहरण के लिए इस भाव में लग्नेश के स्थिति होने का अर्थ यह है कि व्यक्ति अपने बल पर उत्तम आय प्राप्त करेगा।

कालपुरुष कुंडली के अनुसार यह शनि की कुम्भ राशि का भाव होने के कारण इस भाव से व्यक्ति की कामनाएं देखी जाती है, क्योंकि कुम्भ राशि भरे हुए जल को खाली करने का प्रतीक चिंह है। इसीलिए इस भाव से व्यक्ति दूसरों की इच्छाओं की पूर्ति के लिए क्या करेगा और मनोकामनाएं कैसे पूरी करेगा, यह सब एकादश भाव से ही देखा जाता है।

इस भाव से एकादशेश, पंचमेश, नवमेश और गुरु का पूर्ण प्रभाव इस भाव को मजबूती देता है और इच्छाऒं को पूरा करने के लिए धरातल देता है। कामनाओं के पंछी को उड़ने के लिए खुला आकाश देता है।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री
8178677715, 9811598848

ज्योतिष आचार्या रेखाकल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है। कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं। आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं।

इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋणऔर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा,विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

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