ऐसा कहां होता है। ग्रह चाल में सभी फंसे हुए हैं। समय पर सभी काम बनते जाएं, ग्रहों को समझने की जरूरत है।

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया ज्योतिष विशेषज्ञ:- किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो, सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

जैसे हम कोई बीमारी होने पर किसी अच्छे चिकित्सक के पास जाते हैं, वैसे ही किसी अच्छे ज्योतिषी से पहले ही अपनी जन्म कुंडली का अध्ययन करा लेना चाहिए।

क्योंकि कई दोष तब बहुत कष्ट देते हैं, जब उन दोष वाले भावों से संबंधित कोई काम होना होता है।

मान लीजिए कि विवाह का ही प्रश्न बना हुआ है। सैकड़ों कुंडलियों के विश्लेषण पर सामने आया है कि विवाह के मामले में कई जातक सौभाग्यशाली नहीं होते।

शादी-विवाह में विलंब के अलावा दांपत्य जीवन की क्लेश बना रहता है।

जन्म कुंडली में यदि कहीं भी शनि-सूर्य की युति है, एक-दूसरे पर दृष्टि है अथवा युति है तो ऐसे जातक में जैविक ऊर्जा की कमी होती है।

ये दोनों आमने-सामने हों तो शुक्र की बलि ले लेते हैं।

शुक्र की बलि लेने का मतलब दांपत्य जीवन में कलेश इसका आशय यही है कि दांपत्य जीवन का अभाव पैदा करते हैं। देखा गया है कि ऐसे जातकों की शादी बहुत विंलब से होती है अथवा होती ही नहीं है और शादी बाद भी कष्ट बना रहता है।

यदि कुंडली में यह दोष है तो हमें सूर्य के प्रभाव को कम करना चाहिए, क्योंकि क्रूर ग्रह शनि के कोप का सामना सूर्य नहीं कर सकेगा। ऐसी स्थिति में सूर्य की शांति करवाएं

तांबे पात्र में शुद्ध जल भरकर और उसमें थोड़ी सी चीनी (शुगर) या शक्कर मिलाकर सूर्य देव का नियमित अर्घ्य देना चाहिए।

शनि की शांति के लिए छोटे उपाय काम नहीं करते और करते भी हैं तो लंबा समय ले लेते हैं, लिहाजा शनि के जाप करा लेने चाहिए।

जब भी इन दोनों ग्रहों का अंतर-प्रत्यंतर आ रहा हो अथवा दोनों में कोई ग्रह इन पर से गोचर कर रहा हो, तब भी जाप करा लेने चाहिए।

इसी प्रकार शुक्र-मंगल की युति यदि लग्न या सप्तम में है तो भी विवाह में परेशानी रहती है। ऐसे जातक का विवाह होना न होना एक समान होता है।

यदि केतु सप्तमेश गुरु के साथ है अथवा सप्तम के उप स्वामी या उसके नक्षत्र स्वामी के साथ है तो भी विवाह में परेशानी रहती है। विवाह में विलंब का एक और सबसे बड़ा कारण है और वह है ।

शनि-चंद्र का दोष। यह दोष अधिकांश लोगों में होता है और जिस भाव से संबंधित हो, उसको डेमेज कर देता है।

शादी के भाव से संबंधित होने पर कई रिश्ते आते हैं और जब थक जाएं तो शादी कराता है।

चौबीस से छब्बीस साल की उम्र में शादी करा दे तो अगले दस साल तक परेशान रखता है अथवा बत्तीस साल की आयु के बाद शादी कराता है विवाह के मामले में महिलाओं के लिए शुक्र और पुरुषों के लिए मंगल की स्थिति जरूर देख लेनी चाहिए।

लिहाजा किसी सुयोग्य ज्योतिषी से कुंडली का विश्लेषण कराने के बाद खराब ग्रहों की हमेशा शांति ही करानी चाहिए।

उनके लिए रत्न धारण नहीं करना चाहिए। रत्न शुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ाने के लिए होते हैं और जाप-अनुष्ठान अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम करने के लिए।

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453
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