जहां बुजुर्गों का सम्मान वह घर स्वर्ग समान -बृजमोहन अग्रवाल

वृंदावन हॉल में आज का श्रवण कुमार विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

रायपुर :

अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के अवसर पर गुरूवार को बुजुर्गों की चौपाल सामाजिक संगठन द्वारा वृंदावन हॉल में आज का श्रवण कुमार विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रदेश के धर्मस्व कृषि एवं सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे।

मुख्य अतिथि की आसंदी से उपस्थित गणमान्य नागरिकों के समक्ष अपने विचार रखते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है वह घर किसी स्वर्ग से कम नहीं है। और जो लोग अपने बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते हैं उनके जीवन तकलीफों गुजरता रहता है।

बृजमोहन ने कहा कि आज हम जो कुछ भी हैं अपने माता पिता के त्याग और तप की वजह से है।परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हो मां-बाप अपनी संतान को बेहतर से बेहतर परवरिश देने का प्रयास करते हैं।

परंतु आज यह देखा जा रहा है कि वह संतान बड़ा होकर मां बाप के उस त्याग को भूल जाता है और बुजुर्ग मां बाप को वृद्धाश्रम छोड़ने एक क्षण भी नहीं लगाता।बृजमोहन ने कहा कि संयुक्त परिवार की संस्कृति भारत देश में ही हैं। परंतु यहां भी अब एकल परिवार परिवार का प्रचलन शुरू हो गया है। इस प्रचलन की वजह से ही अब परिवारों में बिखराव देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मेरे माता-पिता दोनों मेरे साथ हैं । उनके ही आशीर्वाद से आज मैं 28 सालों से एक जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की सेवा कर पा रहा हूं। राजनीति में होने के कारण देश प्रदेश का भ्रमण करना पड़ता है।

मैं कहीं दूर भी रहूं तो अपने परिवार की चिंता मुझे नहीं रहती क्योंकि मेरे माता पिता उनके पास रहते हैं। इस कार्यक्रम में आरडीए अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखें।

इस अवसर पर निगम के लोकनिर्माण प्रभारी सतनाम सिंह पनाग, संस्था की अध्यक्ष आभा बघेल,प्रीति सतपति,जया गढ़पाले,शैलेन्द्र रात्रे,राहुल शर्मा शर्मा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस दौरान सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संस्थाओं को अग्रवाल ने सम्मानित भी किया।

माता-पिता तुल्य बुजुर्गों की जिम्मेदारी उठाये और पुण्य प्राप्त करें

बृजमोहन ने कहा कि हमारी संस्कृति में कहीं भी वृद्धाश्रम का उल्लेख नहीं है। यह तो हमारे परिवारिक बिखराव की परिणीति है। उन्होंने कहा कि जिनके माता-पिता नहीं है। वे भी माता-पिता तुल्य दो बुजुर्गों की जिम्मेदारी उठाकर पुण्य कमा सकते है।

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