ताज को एक शहंशाह का गरीबों की मुहब्बत का उड़ाया मजाक किसने कहा था

ताजमहल की एक खासियत है. आप इसके दरवाजे से अंदर जाना शुरू करते हैं तो ये दिखने में छोटा होने लगता है. जैसे-जैसे आप इससे दूर जाते हैं, ये बड़ा होने लगता है. ताजमहल बनवाया एक बादशाह ने था मगर उस पर सियासत आज हो रही है.

ताज की शख्सियत कुछ ऐसी है कि इसपर दुनिया भर के कलाकारों का दिल आया है. याद रहे अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पास भी एक आलीशान कसीनो है जिसपर अमेरिकी विपक्ष ने भी खूब हमला बोला. खैर बात करते हैं कुछ बड़े लोगों की जिन्होंने ताजमहल को लेकर कुछ ऐसा कहा जो दुनिया के लिए मिसाल बन गया.
गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने ताज को देखा तो कहा था कि सोना, हीरा रूबी सब खो जाएंगे मगर ताजमहल वक्त के गाल पर ठहरे हुए प्रेम के एक आंसू के तौर पर हमेशा कायम रहेगा. कुछ ऐसी बातें आचार्य रजनीश यानि ओशो ने भी कही थी. ओशो ने कहा था कि ये एक दूसरे स्तर की क्रिएटिविटी है.

ताजमहल को पूर्णिमा की रात में देखना ध्यान लगाने जैसा है. ताज, खजुराहो और कोणर्क के मंदिर कुछ ऐसे बने हैं कि अगर आप इनपर ध्यान लगाएं तो ये आपको वासना और प्रेम का अंतर बताते हैं.
ऐसा भी नहीं है कि हर कोई ताजमहल की खूबसूरती का कायल रहा हो. वामपंथी विचारों वाले शायर और गीतकार साहिर लुधिवानवी को ताजमहल एक बादशाह के द्वारा गरीबों का उड़ाया हुआ मजाक लगा. उन्होंने लिखा,

ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से
इसी तरह से पाकिस्तान से नोबेल जीतने वाले एकमात्र वैज्ञानिक अब्दुल सलाम ने कहा था, जब भारत में ताजमहल बना, इंग्लैंड में भी सेंट पॉल कथीड्रल बना. दोनों ही अपनी तरह की भव्य इमारतें हैं. लगभग उसी दौर में एक और चीज़ भी बनी जो इन दोनों से महान थी, है और रहेगी. 1687 में न्यूटन ने जो तीन सिद्धांत दुनिया को दिए उसका कोई भी जवाब भारत या मुगलों के पास नहीं था.

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