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दो टूक (श्याम वेताल) : छत्तीसगढ़ की जनता असमंजस में किसे चुनें, किसे रोकें

रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्रकृति ने अपना तापमान घटा दिया है लेकिन राजनीतिक गर्मी का पारा चढ़ता जा रहा है. राज्य विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव को देखते हुए यहां ताल ठोंक रही सियासी पार्टियां पूरे दम-खम के साथ मोरचों पर डंट गयी हैं जबकि मतदाता भारी असमंजस में हैं. उसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि उसे अगली सरकार बनाने किस पार्टी को चुनना चाहिए. इस बार, पारंपरिक दो प्रतिस्पर्धी भाजपा और कांग्रेस के अलावा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी मैदान में हैं.

राज्य में पिछले 15 सालों से राज कर रही भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकाल में प्रदेश को विकास की दिशा दी है जिससे राज्य की सूरत बदली है और जनता के जीवन स्तर में भी भरपूर सुधार हुआ है. जिस छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय स्तर पर कोई पहचान नहीं थी, विगत 15 सालों में इसे अच्छा नाम मिला है. कई क्षेत्रों में तो यह अग्रणी भी रहा है. अधिकांश लोगों का मत है कि एक बार फिर भाजपा को मौका देने में कोई हर्ज नहीं है. वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भाजपा शासनकाल में सबकुछ तो ठीक है लेकिन पार्टी के कुछ नेता, मंत्री और अफसर बेलगाम हो गए हैं. वे आम लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते. उनसे कोई काम की अपेक्षा करना व्यर्थ है. बड़े नेताओं और अफसरों के बिगड़ैल रवैये से छोटे सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार और निकम्मापन फैला हुआ है जो लोगों के असंतोष का बहुत बड़ा कारण बन गया है और यही वजह है कि भाजपा का 65 सीटों का लक्ष्य पूर्ण होना संभव नहीं है. दूसरी पार्टियां भी भाजपा के खिलाफ पनप रहे असंतोष को ही भुनाने में लगी हैं. उन्हें अच्छी तरह पता है कि भाजपा के विकास कार्य को तो वे चुनौती नहीं दे सकते लेकिन कुछ मंत्रियों, नेताओं और अफसरों के भ्रष्टाचार और दुर्व्यवहार पूर्ण आचरण को लेकर वे जनता के बीच जा सकते हैं और उनका मन व मत जीत सकते हैं.

मतदाता का मन और मत जीतने की होड़ में कांग्रेस सबसे आगे है. पिछले दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को परास्त करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया. कांग्रेस की किस्मत की कमंद तोड़ने में कुछ कांग्रेसियों का ही हाथ बताया गया था. इस बार कांग्रेस कह रही है कि कमंद तोड़ने वाले अब हमारे साथ नही हैं इसलिए हमारा रास्ता साफ है. हालांकि, पिछले पांच सालों में कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका बहुत ईमानदारी से नही निभायी है लेकिन भाजपा के प्रति बढ़ते असंतोष का सहारा लेकर वे सत्ता में आने का दावा कर रहे हैं. कुछ मौजूदा परिस्थितियां भी कांग्रेस के भाग्य को चमकाने में लगी हैं. मसलन, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आसमान छू रही महंगाई कांग्रेस को बोनस प्वाइंट दे रही है. यदि चुनाव तक पेट्रोल डीजल की कीमतें कम हो गयीं और महंगाई पर लगाम लग गयी तो कांग्रेस को मिलने वाले बोनस प्वाइंट खत्म भी हो सकते हैं. इस बीच, मंत्री की तथाकथित सीडी कांड ने फिर तूल पकड़ लिया है. इस मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि कोर्ट से उन्हें जमानत मिल सकती थी लेकिन अध्यक्ष जी ने जमानत के लिए अर्जी देने से इनकार कर दिया. दूसरे दिन कांग्रेस पार्टी ने अपने अध्यक्ष के समर्थन में गिरफ्तारी दी. अब इस पूरे मामले का पार्टी चुनावी लाभ उठाना चाहेगी.

उधर, राज्य में बहुजन समाज पार्टी और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन हो गया है. इसके तहत बसपा 35 सीटों एवं छजकां 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ये चुनावी गठबंधन भाजपा के बजाय कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि इस गठबंधन से नुकसान की बात को कांग्रेस नकार रही है. उसका कहना है कि बसपा के वोट कभी न कांग्रेस को मिले हैं और न भाजपा को. इसलिए नुकसान होने का प्रश्न ही नहीं उठता. हां, यदि बसपा का कांग्रेस से गठबंधन होता तो कांग्रेस को कुछ फायदा जरूर हो सकता था.

इधर, आम आदमी पार्टी भी राज्य में जोर लगा रही है लेकिन पार्टी का यहां पहला चुनाव है इस लिए उनकी भूमिका सिर्फ वोटकटुवा की हो सकती है. आप के प्रत्याशी भी कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

सितम्बर के आखिरी हफ्ते तक जो परिस्थितियां हैं, उसमें भाजपा का पलड़ा भारी लग रहा है. इसे और भारी बनाने के लिए नरेंद्र मोदी अमित शाह और रमन सिंह की तिकड़ी कोई और नया दांव खेल सकती है. सीएम रमन सिंह चुनाव अधिसूचना के पूर्व किसी नये प्रलोभन-शस्त्र का प्रक्षेपण भी कर सकते हैं. कांग्रेस आहत जनभावना, सत्तादल की दमनकारी नीति, नौकरशाही का भ्रष्टाचार और मंत्रियों, भाजपा नेताओं के दुराचरण को हथियार बनाकर जनता से अपने पक्ष में वोट मांगेगी.

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि असमंजस और दुविधा में फंसी राज्य की जनता किसे सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाएगी या किसी को बहुमत हासिल नही करने देगी.

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