WHO ने कोरोना के भारतीय स्ट्रेन को बताया बेहद खतरनाक, कहा- तेजी से हो रहा है ट्रांसमिट

यह प्रभाव अलग-अलग वैक्सीन पर अलग-अलग हो सकता है।

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने कोविड के भारतीय स्वरूप (बी-1617) को वैश्विक स्तर पर चिंताजनक स्वरूप की श्रेणी में रखा है। डब्ल्यूएचओ में कोविड-19 तकनीकी दल से जुड़ीं डॉ मारिया वैन केरखोव (Maria van Kerkhov) ने सोमवार को कहा कि सबसे पहले भारत में सामने आए वायरस के स्वरूप बी.1.617 को पहले डब्ल्यूएचओ द्वारा निगरानी स्वरूप की श्रेणी में रखा गया था।

डब्ल्यूएचओ के विभिन्न दलों के बीच चर्चा जारी

उन्होंने कहा कि वायरस के इस स्वरूप को लेकर डब्ल्यूएचओ के विभिन्न दलों के बीच भी चर्चा जारी है और उनकी नजर इस बात पर भी है कि हमारे पास इसकी संक्रमण के बारे में क्या क्या जानकारियां हैं तथा भारत एवं अन्य देशों में इस वायरस के प्रसार के बारे में क्या क्या अध्ययन हो रहे हैं। केरखोव ने कहा, कोविड-19 के भारतीय स्वरूप के बारे में उपलब्ध जानकारी एवं इसकी प्रसार क्षमता पर चर्चा करने के बाद हमने इसे वैश्विक स्तर पर चिंताजनक स्वरूप की श्रेणी में रखा है।

वैक्सीन के कंपोजिशन में कुछ बदलाव की जरूरत

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्तमान में कोविड-19 की जो भी वैक्सीन विकसित की जा रही हैं, वे वायरस के नए वेरिएंट्स के खिलाफ भी न्यूनतम सुरक्षा अवश्य देंगी। ये वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी और कोशिकाओं की शाृंखला से एक बड़ा इम्यून रिस्पांस तैयार करती हैं। इसलिए वायरस में कोई भी बदलाव या म्यूटेशन वैक्सीन को पूरी तरह निष्प्रभावी नहीं कर सकता।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार नए स्ट्रेन पर प्रभावी क्षमता बढ़ाने के लिए इन वैक्सीन के कंपोजिशन में कुछ बदलाव कर इन्हें अपग्रेड करना पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी सभी नए स्ट्रेन का डाटा लेकर उनके व्यवहार का अध्ययन कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी और वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं इनका वैक्सीन की प्रभावी क्षमता पर क्या प्रभाव है। यह प्रभाव अलग-अलग वैक्सीन पर अलग-अलग हो सकता है।

म्यूटेशन से निपटने की रणनीति

डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायरस के म्यूटेशन से निपटने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं। पहला तो यह है कि वायरस के संभावित बदलावों को ध्यान में रखकर ही वैक्सीन बनाए और अपग्रेड किए जाएं। दूसरा वैक्सीन एक से ज्यादा स्ट्रेन के लिए बनाए जाएं तीसरा बदलाव के अनुसार बूस्टर टीका अलग से दिया जाए। इसके अलावा अगर जरूरी हो तो वैक्सीन में ही बदलाव किया जाए।

वायरस को बदलने से हम कैसे रोक सकते हैं

अगर वायरस का प्रसार रोक दिया जाए तो उसका म्यूटेशन यानी बदलाव भी रुक जाएगा। यह मुख्य कुंजी है। इसके लिए समय-समय पर हाथ धोते रहें। मास्क पहने रहें। सामाजिक दूरी बनाए रखें। वेंटिलेशन सही रखें। भीड़ भरी जगहों और बंद कमरों में अन्य लोगों के साथ बैठक करने से बचें। संक्रमण प्रसार को रोकने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है।

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