सर्दी के मौसम में क्यों पी जाती है ब्रैन्डी या रम, जानें

ठंड से बचने के लिए थोड़ी सी ब्रैन्डी या रम पी लेना चाहिए। इससे शरीर में गर्मी आती है और किसी तरह का नुकसान नहीं होता

आपने बहुत से लोगों को यह कहते सुना होगा कि सर्दी के मौसम में ठंड से बचने के लिए थोड़ी सी ब्रैन्डी या रम पी लेना चाहिए। इससे शरीर में गर्मी आती है और किसी तरह का नुकसान नहीं होता।

लेकिन ड्रिंक करने के फायदे तभी हैं जब यह सीमित मात्रा में रहे। क्योंकि किसी भी चीज की अति बुरी होती है। फिर चाहे वह नींबू पानी हो या फिर ऐल्कॉहॉल। लेकिन आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या सचमुच सर्दी के मौसम में ब्रैन्डी और रम पीना फायदेमंद है और क्या आपको इसे पीना चाहिए…

दूर होता है हड्डियों-मांसपेशियों का दर्द

ऑस्टियॉपोरोसिस या फिर आर्थराइटिस से जूझ रहे लोग इस बात को बखूबी जानते होंगे कि सर्दियों का मौसम आते ही उनकी समस्या बढ़ जाती है और हड्डियों में तेज दर्द होने लगता है।

ऐसे में सर्दी के मौसम में रम पीने से बोन मिनरल डेन्सिटी बढ़ जाती है और दर्द कम होता है। साथ ही हड्डियों की मजबूती के लिए मांसपेशियों का भी मजबूत होना जरूरी है।

हार्ट रहेगा हेल्दी

आपने भी सुना होगा और डॉक्टर्स भी यह बताते हैं कि सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। लिहाजा सर्दियों में दिल की देखभाल करना बेहद जरूरी है। कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि रम और ब्रैन्डी सर्दियों में हार्ट को हेल्दी रखने में मदद करती है।

शरीर रहेगा गर्म

सदियों से लोग सर्दी के मौसम में ठंड से बचने के लिए रम और ब्रैन्डी का सेवन करते आ रहे हैं। यहां तक की कई बार तो नवजात बच्चे को भी शहद में मिलाकर थोड़ी सी ब्रैन्डी पिलायी जाती है ताकि उन्हें ठंड लगने से बचाया जा सके। यह बात साबित हो चुकी है कि रम और ब्रैन्डी के सेवन से कुछ देर के लिए ही सही लेकिन शरीर गर्म हो जाता है।

सांस की तकलीफ होगी दूर

सर्दी के मौसम में अक्सर सांस से जुड़ी कई बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। खासतौर पर सर्दियों में पलूशन लेवल भी बढ़ जाता है और इससे भी सांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे में ब्रैन्डी का सेवन मददगार साबित हो सकता है।

दरअसल ब्रैन्डी में ऐंटिइन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज होती है जो सांस से जुड़ी तकलीफों को दूर करती है। रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि वैसे लोग जो हर दिन ब्रैन्डी के 2 ड्रिंक लगाते हैं उनमें फेफड़ों से जुड़ी बीमारी होने का खतरा 20 प्रतिशत कम हो जाता है।

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