दो टूक (श्याम वेताल) : भाजपा युवा नेतृत्व क्यों नहीं तैयार कर सकी?

भारतीय जनता पार्टी को देश की बेस्ट कॉडर पार्टी माना जाता है। इसलिए इस पार्टी में नेताओं की कभी नहीं हो सकती, यह धारणा आम लेकिन छत्तीसगढ़ में यह धारणा निर्मूल सिद्ध हो गए है। इसका प्रमाण कल जारी हुई पार्टी प्रत्याशियों की सूची से मिलता है।

इस सूची की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि इसमें 13 प्रत्याशी ऐसे हैं जो पिछली बार चुनाव हार गए थे लेकिन, पार्टी ने इस बार उन पर फिर दांव लगाया है। कारण यह बताया गया है कि यदि टिकट नहीं दिया जाता तो वहां बगावत की आशंका थी। आश्चर्य है कि वर्ष 2013 के चुनाव में हारने वाले लोगों का विकल्प पांच साल में भी पार्टी नहीं तैयार कर पाई! अगर कॉडर बेस्ट पार्टी है तो 5 साल पहले ही यह मन स्थिति बना लेनी चाहिए थी कि उस क्षेत्र विशेष में नया नेतृत्व खड़ा किया जाए।

ये ठीक है कि बुजुर्ग नेताओं का प्रभाव व्यापक रहता है लेकिन कहीं जगह यह प्रभाव दिखावटी साबित होता है। नेता के सामने तो वोटर हाथ जोड़कर खड़ा रहता है लेकिन उसके आगे बढ़ते ही वोटर की नकारात्मक प्रतिक्रिया भी देखने सुनने को मिलती है। एक बात और बुजुर्ग नेताओं को आज का युवा कम पसंद करता है। उसका आकर्षण युवा नेताओं ने रहता है।

जहां तक भाजपा की सूची का प्रश्न है पार्टी ने कल जिन 77 प्रत्याशियों की सूची जाहिर की है उनमें 40 साल तक की उम्र सिर्फ 25 युवा हैं। 9 पूर्व विधायकों, जो पहले चुनाव हार चुके थे, को फिर से टिकट दिया गया है। पार्टी ने 70 साल से ऊपर के लोगों को ही प्रत्याशी बनाया है। इसमें ननकी राम कंवर प्रमुख हैं। ननकी राम पिछला चुनाव भी हार चुके थे लेकिन पार्टी पांच सालों में रामपुर में कोई युवा नेतृत्व नहीं तलाश पाई है।

यह ठीक है कि चुनाव जीतने के लिए पार्टी ने जीताऊ प्रत्याशियों को चुना है लेकिन युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी को नई पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता ना केवल तलाशी होगी बल्कि उसे तराशने का भी काम करना होगा। यह काम करने की क्षमता भाजपा जैसी बड़ी पार्टी में ही संभव है और इस पार्टी के लिए सहज भी है।

पार्टी ने जिन 35 विधायकों को फिर से मौका दिया है, उम्मीद की जा सकती है कि वे फिर जीतकर आएंगे। पार्टी ने क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों एवं उनकी सक्रियता की वजह से ही उन्हें चुना है।

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