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जिस गलवान घाटी में झड़प हुई वो क्यों भारत और चीन के लिए बनी अहम

पूरी घाटी पर नियंत्रण चाहता है

गलवान घाटी ही वो जगह है, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प है. जिसमें भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हुए हैं. उधर चीन का भी कहना है कि उसके पांच सैनिक इसमें मारे गए हैं.

पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तनाव बढ़ गया. इस बीच गलवान घाटी कई बार चर्चाओं में आई है. ये झड़प भी वहीं हुई है

इसे गलवान घाटी इसलिए कहते हैं, क्योंकि ये गलवान नदी से लगा इलाका है. ये इलाका सामरिक तौर पर काफी अहम हो गया. चीन को लगता है कि अगर गलवान नदी घाटी के पूरे हिस्से को नियंत्रित नहीं करेगा तो भारत अक्साई चिन पठार तक आसानी से पहुंच सकता है. जिससे चीन की पोजिशन कमजोर पडे़गी. भारत भी यही समझते हुए इस इलाके को छोड़ना नहीं चाहता.

गलवान में भारतीय चौकियों की क्या स्थिति हैगलवान नदी पूर्वी लद्दाख के उन क्षेत्रों में एक है, हां चीन को भारतीय ध्वज दिखाने के लिए सेना की चौकियों की स्थापना की गई थी. लेकिन ये चौकियां उतनी मजबूत कभी नहीं रही हैं. लेकिन इस चौकी को अपने पास बनाए रखने के लिए भारतीय सैनिकों ने हमेशा चीन को टक्कर दी है.

इसके बाद 1962 के बाद ये इलाका करीब करीब निष्क्रिय रहा. लेकिन ऐसा लगता है कि चीन पिछले 04-05 सालों से इस इलाके में सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है.

चीन भी दूसरी ओर कर रहा है निर्माण


वर्ष 2016 तक चीन ने गलवान घाटी के मध्य बिंदु तक पक्की सड़क का निर्माण कर लिया था. माना जा रहा है कि चीन इस इलाके के काफी पास तक अपनी कोई सड़क बना चुका होगा. चीन इस इलाके आसपास कई चौकियों का निर्माण कर लिया है. यहां चीनी सैनिक लगातार गश्त करते हैं. यहां से 40-50 किलोमीटर दूर चीन का बडा़ बेस भी है.

पूरी घाटी पर नियंत्रण चाहता है


अब माना जाता है कि चीन गलवान घाटी को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में करना चाहता है. क्योंकि उसे ये महसूस हो रहा है कि अगर भारत अपनी योजना के तहत गलवान घाटी क्षेत्र में निर्माण कर लेता है तो रणनीतिक तौर पर इलाके में मजबूत स्थिति बना लेगा, ये चीन कतई नहीं चाहता. हालांकि भारत सरकार का कहना है कि गलवान नदी क्षेत्र सहित पूरे लद्दाख क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे का काम जारी रहेगा. इसे मूल जरूरतों के मुताबिक पूरा किया जाएगा.

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