सिर्फ ढाई टन सोने के लिए क्यों की गई सोनाखान की नीलामी?

देश आयात करता है प्रतिवर्ष 700 टन सोना, जानिए सोनाखान के बारे में

रायपुर।

पर्यावरण व वन्य जीव प्रेमियों ने प्रश्न उठाया है कि जब देश प्रतिवर्ष 700 मेट्रिक टन सोना आयात करता है तो छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में सिर्फ 2700 किलो सोना खनन के लिए क्यों नीलामी की गई? 2700 किलो सोना देश के वार्षिक आयात का सिर्फ 0.39% होता है. वर्तमान दरों से देश में रुपए 231000 करोड़ का सोना प्रति वर्ष आयात होता है जबकि सोनाखान मैं कई वर्षों के खनन में सिर्फ रुपए 820 करोड का सोना निकलेगा.

पर्यावरण प्रेमियों ने छत्तीसगढ़ शासन के माइनिंग लाइसेंस निरस्त करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने 26 फरवरी 2016 को निविदा करने के बाद में 24 अप्रैल 2016 और 17 मार्च 2017 को मैसर्स वेदांता लिमिटेड गोवा के नाम से कंपोजिट लाइसेंस जारी करने हेतु आशय पत्र (LOI) जारी किया था बाद में कंपनी ने ₹ 16213920 की परफारमेंस बैंक गारंटी जमा की.

जानिए सोनाखान के बारे में :

1. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के कसडोल क्षेत्र में बाघमारा गोल्ड ब्लॉक अर्थात सोनाखान जोकि बारनवापारा वनअभ्यारण के इको सेंसेटिव जोन से लगा हुआ है मैं 474 हेक्टर भूमि मे माइनिंग की जानी है. पहले इको सेंसेटिव जोन की 133 हेक्टर भूमि भी माइनिंग के लिए दी जा रही थी.

2. माइनिंग के लिए प्रस्तावित वन क्षेत्र मैं तेंदुआ, भालू, बायसन,
टाइगर, हिरणों की कई प्रजातियों इत्यादि है इसके अलावा यह हाथियों का विचरण क्षेत्र भी है. खनन से वन्यजीव रहवास क्षेत्र में नेगेटिव प्रभाव पड़ेगा. प्रस्तावित खनन क्षेत्र में सागौन, बास, साजा, बीजा, हल्दु महुआ, तेंदु इत्यादि प्रजातियों के लगभग दो लाख वृक्ष भी है.

3. वन विभाग के डी.एफ.ओ. ने जताई थी आपत्ति: बलौदाबाजार वन मंडलअधिकारी ने माइनिंग अनुमति से होने वाले नुकसान को बताते हुए लिखा था कि माइनिंग से समीप के क्षेत्रों में अवैध वन कटाई और अतिक्रमण की संभावनाएं बढ़ जाएंगी और मानव-वन्य प्राणी द्वंद की घटनाएं बढ़ेगी.

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी सोना खान की माइनिंग हेतु जारी आशय पत्र को निरस्त करने की मांग काफी पहले से कर रहे हैं. उन्होंने 17 फरवरी 2018 को सचिव पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन नई दिल्ली को पत्र लिखकर यह मांग की थी. बाद में 18 जुलाई 2018 को मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन से भी मांग की गई. नई सरकार गठन के पश्चात 29 दिसंबर 2018 को भी मुख्य सचिव को पत्र लिखकर माइनिंग लीज निरस्त करने की मांग की गई.

राज्य वन जीव बोर्ड के पूर्व सदस्य प्राण चड्ढा और बाघों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत मूलतः बैकुंठपुर कोरिया निवासी, भोपाल के अजय दुबे ने भी शासन के इस सोनाखान की माइनिंग निरस्त करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है .

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